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“कारवाँ” में छपी सरकारी भूखंड लेने वाले पत्रकारों की सूची पर सवाल !

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मीडिया विजिल ने पिछले दिनों आभार सहित चर्चित पत्रिका ‘कारवाँ’ की उस स्टोरी का अनुवाद छापा था जिसमें दावा किया गया था कि मध्यप्रदेश सरकार ने दो आवासीय समितियों के ज़रिये 300 से ज़्यादा पत्रकारों को बेहद कम दाम पर आवासीय भूखंड उपलब्ध कराये। कारवाँ ने पत्रकारों की सूची भी छापी थी और दावा किया था कि सभी पत्रकारों से उनके संवाददाताओं ने पक्ष जानने की की कोशिश की थी। लेकिन मध्यप्रदेश के कुछ पत्रकारों ने कारवाँ के दावे का खंडन किया है। वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खांडेकर ने मीडिया विजिल को भेजे खंडन में कहा है कि उन्होंने कभी कोई भूखंड नहीं लिया है और न ही वे किसी समिति के सदस्य हैं। यह स्टोरी कारवाँ की है और अगर कोई तथ्यात्मक ग़लती है तो उसे इसका खंडन छापना चाहिए। मीडिया विजिल को उम्मीद है कि कारवाँ किसी न किसी रूप में पत्रकारो ंकी ओर से उठ रही उँगलियों का जवाब देगी। फिलहाल पढ़िये कि मीडिया विजिल को क्या लिखते हैं अभिलाष खांडेकर—

मैं ‘अभिव्यक्ति हाउसिंग कोआपरेटिव सोसायटी’ का सदस्य था जो तब दैनिक चौथा संसार में काम करने वाले एक साथी पत्रकार दिनेश गुप्ता ने बनाई थी। यह 10-12 साल पहले की बात है। उनके दिमाग़ में पत्रकारों का भला करने का विचार था। लेकिन जब सोसायटी का कामकाज उम्मीद के मुताबिक गति नहीं पकड़ सका तो मैंने मीटिंगों में जाना बंद कर दिया जो यूँ भी कभी-कभार ही बुलाई जाती थीं। बाद में मैं इससे पूरी तरह अलग हो गया।

मैंने सोसायटी के सदस्य बतौर कोई भूखंड प्राप्त नहीं किया है। न ही सरकार से ही रियायती दर पर या आउट ऑफ टर्न आधार पर कोई आवासीय भूखंड लिया है। इसकी जाँच किसी भी एजेंसी से कराई जा सकती है। मेरे पास पूरे मध्यप्रदेश में पत्रकारों की किसी भी आवासीय समिति से प्राप्त कोई भूखंड नहीं है।

कारवाँ की ख़बर से मेरी प्रतिष्ठा पर आँच आई है। ख़बर छापने के पहले पत्रिका के किसी रिपोर्टर ने मुझसे कभी संपर्क नहीं किया।

अभिलाष खांडेकर  
उधर, एबीपी के मध्यप्रदेश ब्यूरो प्रमुख ब्रजेश राजपूत ने भी कारवाँ की स्टोरी पर सवाल उठाये हैं। उपकृत होने वाले पत्रकारों की लिस्ट में उनका भी नाम है। ब्रजेश ने फ़ेसबुक पर लिखा है–

Brajesh Rajput कारवाँ की ये कहानी जजों पर सरकार की ओर से की गयी मेहरबानी पर है। पत्रकारों की सोसायटी को बेवजह घसीट लिया गया है। कहानी में जिस वक़ील को हीरो की तरह पेश किया गया है उस पर कोर्ट ग़लत तथ्य पेश करने पर जुर्माना लगा चुका है। तथ्यों को ग़लत पेश करने पर सोसयटी नोटिस दे रही हैं।

Like · Reply · 1 · June 25 at 8:34am