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BHU: दिल्‍ली में कुलपति के गुप्‍त ठिकाने पर पहुंचे पत्रकार के साथ बदसलूकी, नहीं दिया इंटरव्‍यू

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सोमवार को दिन भर घटे नाटकीय घटनाक्रम के बीच जब देर शाम कुछ राष्‍ट्रीय अखबारों में ख़बर आई कि बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय के कुलपति लंबी छुट्टी पर चले गए हैं, तो बनारस के मीडिया में  इसकी पुष्टि करने के लिए हड़कंप मच गया। अलग-अलग अख़बारों ने एक-दूसरे की खबर को फॉलो करते हुए इस ख़बर को छाप दिया, लेकिन इसकी पुष्टि करने के लिए देर रात तक न तो विश्‍वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी और न ही कुलपति ने फोन उठाया।

इस बीच विश्‍वविद्यालय के एक वरिष्‍ठ प्रशासनिक अधिकारी ने मीडियाविजिल को देर रात बताया कि कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी दिन में दिल्‍ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय गए थे जहां उन्‍होंने लंबी छुट्टी का आवेदन दिया है। देर रात मीडियाविजिल को मिली सूचना के मुताबिक आइआइटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल को विश्‍वविद्यालय का कार्यकारी कुलपति नियुक्‍त किया जा सकता है। इसकी पुष्टि हालांकि किसी सूत्र से नहीं हो सकी है।

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स में छपी ख़बर के मुताबिक बीएचयू के पीआरओ राजेश सिंह ने बताया कि कुलपति नौ दिन का व्रत रहने के बाद रविवार को इलाहाबाद अपने घर चले गए थे और वे सोमवार की देर रात वापस आएंगे। राजेश सिंह ने कई बार फोन करने पर भी फोन नहीं उठाया। कुलपति के इलाहाबाद जाने को लेकर हकीकत हालांकि दूसरी है, जिसके बारे मे मीडियाविजिल के पास खास जानकारी अपने सूत्रों से है।

दरअसल, कुलपति त्रिपाठी सोमवार की सुबह दिल्‍ली के कटवारिया सराय स्थित लालबहादुर शास्‍त्री संस्‍कृत विद्यापीठ के अतिथि गृह के कमरा नंबर तीन में थे। उनके साथ पवन द्विवेदी नाम के एक सज्‍जन भी थे। यह कमरा किसी और के नाम पर बुक कराया गया था और कुलपति बिना अपनी पहचान जाहिर किए वहां रुके हुए थे। ऐसा इसके बावजूद था कि सोमवार को गांधी जयंती थी जिसका आयोजन कुलपति की उपस्थिति में होना बीएचयू की परंपरा रही है। प्रो. त्रिपाठी इस परंपरा को तोड़ते हुए गांधी जयंती का कार्यक्रम टालकर चुपचाप दिल्‍ली निकल लिए थे।

उनके दिल्‍ली में होने की ख़बर जब एक पत्रकार को लगी, तो वह सीधे विद्यापीठ के अतिथि गृह में पहुंचा। वहां पत्रकार को देखकर कुलपति और उनके साथ मौजूद पवन द्विवेदी चौंके और उन्‍होंने उक्‍त पत्रकार से पूछ दिया कि उसे कुलपति के वहां होने की सूचना कैसे मिली। पत्रकार ने कुलपति का साक्षात्‍कार लेने की इच्‍छा ज़ाहिर की तो उसके साथ पहले तो धक्‍का-मुक्‍की की गई और कमरे से बाहर धकेल दिया गया। फिर उसके आग्रह करने पर पहले तो बहाना बनाया गया के कुलपति को बुखार है और वे बात नहीं कर सकते। बाद में पत्रकार को देर शाम आने को कहा गया क्‍योंकि कुलपति त्रिपाठी कहीं निकल रहे थे।

पत्रकार को कुलपति के साथ उपस्थित पवन द्विवेदी ने भरोसा दिलाया कि वे रात को वहीं रुकेंगे और लौटकर आने के बाद साक्षात्‍कार देंगे। यह घटना दिन में दो बजे के आसपास की है। सूत्रों की मानें तो कुलपति त्रिपाठी इसके बाद पहले तो झंडेवालान स्थित राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के कार्यालय गए, उसके बाद भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय में मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलने गए। इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि उनकी मुलाकात जावड़ेकर से हुई या नहीं, लेकिन बताया जा रहा है कि उन्‍होंने अपनी लंबी छुट्टी का आवेदन मंत्रालय में लिखित तौर पर जमा किया।

देर शाम कुलपति समेत पवन द्विवेदी ने दिल्‍ली के उक्‍त पत्रकार का कई बार फोन नहीं उठाया। उसके बाद जब पत्रकार सीधे अतिथि गृह में कुलपति से मिलने पहुंचा, तो उसे भीतर नहीं घुसने दिया गया और बताया गया कि कमरा नंबर तीन के गेस्‍ट वापस जा चुके हैं।