Home पड़ताल कनाडा के एफएम रेडियो पर मोदी की आलोचना यानी नौकरी से छुट्टी!

कनाडा के एफएम रेडियो पर मोदी की आलोचना यानी नौकरी से छुट्टी!

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Shiv Inder Singh

केंद्र की एनडीए सरकार, भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस और इनसे संबद्ध संगठनों व इनकी नीतियों के साथ असहमति रखने वाले पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया जाना या प्रताडि़त किया जाना भारत में बीते तीन साल के दौरान आम बात हो चुकी है, लेकिन ऐसा पहला मामला कनाडा के एक रेडियो स्‍टेशन से सामने आया है जो प्रवासी भारतीयों के लिए वहां सूचना पहुंचाने का काम करता है।


कनाडा के वैंकूवर स्थित रेडियो रेड (93.1) एफएम में पिछले दो साल से काम कर रहे पंजाब के पत्रकार शिव इंदर सिंह की सेवाएं इसलिए समाप्‍त कर दी गई हैं क्‍योंकि उन्‍होंने अपनी खबरों में मोदी सरकार की आलोचना की थी। रेडियो स्‍टेशन ने उनकी सेवाएं समाप्‍त करने में कनेडियन रेडियो-टेलीविज़न एंड टेलीकम्‍युनिकेशंस कमीशन (सीआरटीसी) के नियमों के उल्‍लंघन का हवाला दिया है।

शिव इंदर सिंह बीते 15 वर्षों से पंजाब के लुधियाना में रहकर स्‍वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं। वे विदेश के कुछ रेडियो स्‍टेशनों को अपनी सेवाएं भी देते हैं और पंजाबी में सुही सवेर नाम की एक लोकप्रिय समाचार वेबसाइट चलाते हैं। शिव इंदर ने एक खुला पत्र लिखा है जिसे कई पत्रकारों और वेबसाइटों को भेजा है, साथ ही अपनी फेसबुक दीवार पर भी शाया किया है। पत्र का शीर्षक है ”मीडिया की कार्यप्रणाली में राजनीतिक दखलंदाज़ी और अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता से छेड़छाड़ की कोशिश”। इस विस्‍तृत पत्र में उन्‍होंने बताया है कि सोमवार से गुरुवार रोज़ाना शाम के शो में वे समाचार बुलेटिन में भारत से समाचार अपडेट और टिप्‍पणी देने का काम कनाडा के रेड एफएम के लिए अक्‍टूबर 2014 से करते आ रहे थे। इसके लिए उनके साथ बाकयदा एक अनुबंध था कि वे वैंकूवर क्षेत्र के किसी औश्र रेडियो स्‍टेशन को ऐसी सेवाएं नहीं देंगे।

शिव इंदर के मुताबिक शाम के शो के एक प्रस्‍तोता विजय वैभव सैनी पिछले कुछ महीनों से उन्‍हें भारत सरकार की नीतियों के विरोध में टिप्‍पणी करने पर ”शर्मिंदा” कर रहे थे। उन्‍होंने लिखा है, ”कभी-कभार हमारे बीच गरमागरम बहस भी हुई जिसके चलते मैंने रेड एफएम के सीईओ कुलविंदर संघेरा से इसमें हस्‍तक्षेप करने की मांग की थी। ऐसा लगता है कि इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।”

वे लिखते हैं यह विवाद 27 जुलाई, 2016 को और मुखर हो गया जब ”मैंने शाम के शो में अतीत में भारत और पाकिस्‍तान के बीच हुई सैन्‍य झड़प के बारे में बताया। चूंकि भारत सरकार उस अध्‍याय की सालगिरह मना रही थी, लिहाजा मैंने श्रोताओं को इसक बारे में याद दिलाना बेहतर समझा।” इसके बाद सैनी और शिव इंदर के बीच बहस हुई और अगली सुबह समाचार शो के लिए अपडेट लेने के लिए उनके पास कनाडा से फोन नहीं आया। कई बार पता करने की कोशिश के बाद उन्‍हें पता चला कि तीन महीने के लिए प्रोग्राम को मुल्‍तवी किए जाने के कारण उनसे सेवाएं नहीं ली जा रही हैं। आखिरकार 3 अगस्‍त को हुई एक बैठक में सीईओ संघेरा ने उनके सहयोगियों को बताया कि कुछ श्रोताओं ने मोदी सरकार और भारतीय सेना की आलोचना पर आपत्ति जतायी है और यह कार्रवाई ”सीआरटीसी के कड़े नियमों के चलते की गई है जिसके तहत समुदाय के लोगों की भावनाओं को आहत नहीं किया जाना चाहिए”।

शिव इंदर ने इस संबंध में सीईओ को 15 अगस्‍त को एक मेल लिख कर पूछा था कि उन्‍होंने सीआरटीसी के मानकों का उल्‍लंघन कैसे किया है, लेकिन उसका जवाब अब तक नहीं आया है। वे लिखते हैं कि ऐसी ही एक घटना 2014 में रेडियो इंडिया 1600 एएम में हुई थी जब एक प्रमुख रेडियो प्रस्‍तोता के ऊपर मोदी का समर्थन करने और आलोचना बंद करने का दबाव बनाया गया था, जिसके बाद उसने इस्‍तीफा दे दिया था। उस वक्‍त शिव इंदर इस रेडियो के साथ काम करते थे इसलिए उन्‍हें इस घटना की पूरी जानकारी है। इसके बाद उन्‍होंने रेडियो इंडिया छोड़ दिया था और रेड एफएम में काम करने लगे थे।

शिव इंदर लिखते हैं कि उनकी प्रमुख चिंता यह है कि ”न केवल भारत में बल्कि दक्षिण भारतीय प्रवासियों के बीच भी मीडिया की कार्यप्रणाली में राजनीतिक दखलंदाजी की जा रही है… जिस तरह से सीआरटीसी का नाम इसमें घसीटा जा रहा है और पत्रकारों में बेमतलब का झूठा हौवा खड़ा किया जा रहा है, वह उसकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। इस मामले की जांच होनी चाहिए।”