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यह चुनाव सत्ता नहीं,भारत की आत्मा को बचाने के लिए है- राहुल गाँधी

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हर भारतीय को जानने का हक़ है कि देश का नेतृत्व करने का दावा करने वाले राजनेताओं के विचार या सोच-समझ क्या है। अफ़सोस कि मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और न ऐसे इंटरव्यू ही देते हैं जिसमें मर्ज़ी से सवाल पूछने की इजाज़त हो। बहरहाल, राहुल गाँधी का एक इंटरव्यू पढ़िए जिसमें उन्होंने खुलकर तमाम सवालों के जवाब दिए हैं- संपादक

सवाल : क्या मैं राजनीति के प्रति उसी राहुल गाँधी से बात कर रहा हूँ जिन्होंने जयपुर के कांग्रेस अधिवेशन में कहा था कि “सत्ता ज़हर है?” या आपमें एक रेडिकल बदलाव आया है और अब आप यह मानते हैं कि सत्ता जनता की सेवा का सर्वश्रेष्ठ माध्यम भी है?

जवाब : सत्ता के प्रति मेरे दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं आया है. मेरी मान्यता है कि सत्ता तब ज़हर है जब इसे कमज़ोर लोगों  ख़िलाफ़ हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाए, या इसे निजी संपत्ति बनाने के लिए उपयोग किया जाए. मेरा यह भी भरोसा है कि सत्ता में जो लोग हैं उन्हें अपनी ताक़त का इस्तेमाल जनता के सशक्तीकरण के लिए और उनकी आवाज़ों तथा चिंताओं की ओर ध्यान देने के लिए करना चाहिए. ख़ासतौर पर उन आवाज़ों के लिए जिन्हें दबाया गया है और जिन्हें कोई अभिव्यक्ति नहीं मिलती.

सवाल : इस बदलाव की प्रक्रिया में अपमानजनक प्रचारों में आपको कांग्रेसमुक्त भारत के लिए पप्पू कहे जाने से और आपके परिवार को मुक़दमों में फँसाये जाने की कोशिशों से भी भिड़ना पड़ा . आपने इन सबका सामना कैसे किया?

जवाब : मुझे दी गई गालियाँ एक ऐसी जगह से आईं जहाँ क्रोध, घृणा और कुंठा थी. मैं उसी भाषा में जवाब देने में भरोसा नहीं करता. आप गुस्से का सामना गुस्से से नहीं कर सकते. असल में मैं लगातार गालियों और तानों के लिए प्रधानमंत्री का आभारी हूँ . उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है, ख़ासतौर पर धीरज. आप उस आदमी से कैसे नफरत कर सकते हैं जिसने आपको कुछ सिखाया है? प्रधानमंत्री मुझसे नफरत कर सकते हैं लेकिन मेरे दिल में उनके लिए बस प्यार है क्योंकि मैं जानता हूँ कि मेरे प्रति उनका गुस्सा केवल उनकी अपनी असुरक्षा और उनके भय से उपजा है.

सवाल : आज जिसमें सबकी रुचि है उस संसदीय चुनाव की तरफ आने से पहले ईमानदारी से बताइये कि जब आपने अध्यक्ष की कुर्सी सम्भाली तो क्या आपकी पार्टी में कोई पीढ़ीगत तनाव था? अगर हाँ तो क्या जैसे जैसे राजनैतिक वास्तविकता की आपकी समझ गहरी हुई आप धीरे धीरे इसका सामना परिपक्वता से करना सीख पाए?

जवाब : बिलकुल नहीं! कांग्रेस ने सफलतापूर्वक अनुभव को युवपन के साथ मिलकर काम करना सीखा है जिससे हमें एक मज़बूत टीम खड़ी करने में सहायता मिली है. हमारे वरिष्ठ हमें पार्टी का भविष्य में नेतृत्व करने के लिए नई पीढ़ी के नेताओं को तैयार करने में सहायता कर रहे हैं. राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के हर विभाग, फ्रंटल संगठनों और कमेटियों में नई प्रतिभाएँ शामिल की गई हैं.  पार्टी में अच्छी प्रतिभाओं के लिए बहुत जगह है और इसके लिए उम्र बाधा नहीं है.

सवाल : चुनावों पर चलते हैं. क्या आप भी यह मानते हैं कि आज़ादी के बाद यह सबसे बड़ी लड़ाई है?

जवाब : यह चुनाव सत्ता के लिए संघर्ष नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा के लिए है. अर्थव्यवस्था के बुरे हाल, कृषि संकट और व्यापक बेरोज़गारी के साथ-साथ हमारे सबसे शानदार मूल्य धर्मनिरपेक्षता, विविधता और बहुलतावाद पर हमले हुए हैं.

सुप्रीम कोर्ट, आर बी आई और सीबीआई जैसी हमारी संवैधानिक संस्थाओं पर सुनियोजित हमले हुए हैं. जो अफ़सर ईमानदार हैं लेकी आर एस एस के हिसाब से काम नहीं करते उन्हें हटाया जा रहा है जैसे सीबीआई के प्रमुख आधी रात को हटाये गए. हमने पहली बार भारतीय जनता का ध्यान इस ओर आकर्षित करती सुप्रीम कोर्ट के चार जज़ों की नाटकीय प्रेस कांफ्रेंस देखी कि किस तरह न्यायालय की प्रक्रियाओं और फैसलों को प्रभावित किया जा रहा है.

यहाँ तक कि आँकड़े इकट्ठा करने और विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रदर्शन की जाँच करने वाले प्रतिष्ठित संस्थानों  को दबाया जा रहा है और नष्ट किया जा रहा है. हमारे बच्चे जो स्कूली किताबें पढ़ते हैं उनमें आर एस एस के विचार थोपे जा रहे हैं. ये उस भयावह रास्ते के कुछ उदाहरण हैं जिन पर आर एस एस/भाजपा हमें ले जा रहे हैं, जिसका परिणाम अराजकता और अशांति होगा अगर ये फिर से चुने गए तो.

सवाल : दो बड़े राज्यों यूपी और बंगाल में विपक्षी एकता बिखर गई. आपने उत्तर प्रदेश में महागठबंधन का हिस्सा होने का वादा सार्वजनिक रूप से किया था. क्या हो गया?

जवाब : बंगाल जटिल है. यहाँ के हालत पर पार पाना मुश्किल है. उत्तर प्रदेश में हमें उम्मीद थी. लेकिन सपा-बसपा को लगा उन्हें अकेले जाना चाहिए. अब देखिये क्या होता है. अगर सपा-बसपा-कांग्रेस का गठबंधन होता तो परिणाम भाजपा के लिए भयावह होते. जो भी हो, इन दोनों राज्यों में सेकुलर ताक़तें ही जीतने जा रही हैं.

सवाल : मायावती ने कांग्रेस के प्रति दुश्मनाना रवैया क्यों अपना लिया? क्या वह बहुत ज़्यादा दबाव में काम कर रही हैं?

जवाब : मैं नहीं जानता. इस सवाल का उत्तर देने में असमर्थ हूँ मैं.

सवाल : बंगाल में राज्य कांग्रेस पिछले दो-तीन साल से वाम के साथ काम कर रही थी. दोनों दाल गठबंधन चाहते थे. आपकी भी सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी से बढ़िया पटती है.  फिर बातचीत कैसे टूट गई?

जवाब : मेरे ममता बनर्जी से भी अच्छे रिश्ते हैं. ज़्यादातर विपक्षी नेताओं से मेरे अच्छे निजी रिश्ते हैं. लेकिन जैसा कि मैंने आपसे कहा, हमारी राज्य इकाई ने तय किया कि पार्टी के हित में यह है कि हम अकेले चुनाव लड़ें.

सवाल : ज़ाहिर तौर पर आप नरेंद्र मोदी को अपराजेय नहीं मानते हैं ; आप यह कह रहे हैं कि वह हारेंगे.

जवाब : भारत की जनता मोदी को हराएगी, मैं नहीं.

सवाल : इतना आत्मविश्वास कैसे है आपको और क्या प्लस प्वाइंट्स हैं मोदी के और क्या उन्हें भेद्य बनाता है?

जवाब : भारत के तीन करोड़ युवाओं की नौकरी चली गई…नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था का सत्यानाश कर दिया. यह एक आर्थिक विनाश साबित हुआ और प्रधानमंत्री यह स्वीकार नहीं करना चाहते कि संकट है.

और भयानक भ्रष्टाचार है. तीस हज़ार करोड़ रुपये चुराकर अम्बानी को दे दिए गए. सोचिये भाई (मुकेश अम्बानी) ने उसे जेल जाने से बचाया. एक ऐसे आदमी को रक्षा का ठेका दे दिया गया जिसे जेल से बचाया जा रहा है. यह उनकी बिजनेस योग्यता है!

फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि मोदी ने उन्हें अनिल अम्बानी को ठेका देने को कहा, 526 करोड़ का एयरक्राफ्ट 1600 करोड़ में खरीदा गया…सीबीआई प्रमुख को रात के एक बजे हटा दिया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें फिर से नियुक्त किया जाए और उनको फिर हटा दिया गया. रक्षा मंत्रालय के आधिकारी लिखित में कहते हैं कि पीएमओ समानान्तर निगोसियेशन कर रहा है. मनोहर पर्रीकर ने कहा कि उन्हें इस डील के बारे में पता नहीं है. इतने सारे सबूत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं. एकदम स्पष्ट है कि मोदी भ्रष्ट हैं.

सवाल : लोगों के मन में यह भी एक धारणा है और बीजेपी ने इसका प्रभावी रूप से कांग्रेस की आलोचना के लिए इस्तेमाल किया है कि कांग्रेस करप्ट है.

जवाब : मुझे नहीं लगता यह अवधारणा अब है. राफाएल भ्रष्टाचार का एक स्पष्ट केस है. राफाएल डील पर बातचीत कर रहे भारतीय दल ने सीधे प्रधानमंत्री का नाम लिया ..यह आपराधिक है. मीडिया इसे उठाने में डर रही है.

सवाल : आप कहते हैं मोदी ने वादे पूरे नहीं किये. क्या आप यह कह रहे हैं कि वादे पूरे नहीं करने के लिए किये गए थे? आपका क्या मानना है, मोदी वादे अयोग्यता के कारण नहीं पूरे कर पाए या नीयत नहीं थी?

जवाब : मेरा मानना है कि वादे पूरे करने की कभी नीयत ही नहीं थी. वे बस उन्हें सत्ता में लाने के लिए किए गए थे. मोदी क्रोनी पूंजीपतियों के एक समूह का औज़ार हैं और उनके लिए वह बहुत सफल प्रधानमंत्री हैं. जहाँ तक उनका सवाल है मोदी ने उनका साढ़े तीन लाख करोड़ का कर्जा माफ़ कर दिया. लेकिन किसानों की सहायता नहीं की उन्होंने. अपने दोस्तों के लिए शानदार काम किया लेकिन युवाओं के लिए नौकरियाँ नहीं पैदा कीं.

सवाल: आप कारपोरेट लूट के ख़िलाफ़ बात करते हैं …

जवाब: यह कॉर्पोरेट लूट नहीं है. बहुत से ऐसे कॉरपोरेट हैं जो एकदम ईमानदार हैं और देश की बड़ी सेवा कर रहे हैं. यह क्रोनी पूँजीवाद है. तो अनिल अम्बानी को तीस हज़ार करोड़ रुपये मिले, लेकिन सब जानते हैं कि वह कांट्रेक्ट पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं. तो यह सिर्फ़ उपहार है. इसे आप “कॉरपोरेट” नहीं कह सकते, यह कॉरपोरेट शब्द का अपमान है. यह चोरी है. लेकिन देश में ऐसे कॉरपोरेट हैं जिन पर हमें गर्व होना चाहिए, जो देश के लिए शानदार काम करते हैं और ऐतिहासिक रूप से करते रहे हैं. 

सवाल : राहुल गाँधी हमेशा ग़रीबों की बात करते हैं, वंचितों की बात करते हैं. क्या यह मोदी से लड़ने की एक रणनीति है या कमिटमेंट है? क्या सत्ता में आने के बाद भी आपकी राजनीति यही रहेगी?

जवाब: मेरा रिकॉर्ड देखिये. जब हम सरकार में थे तो मोदी कहीं दृश्य में नहीं थे. उस समय मैंने नरेगा के लिए दबाव बनाया. मैं आदिवासियों की ज़मीन के लिए नियमगिरि में लड़ रहा था. हम सरकार में ही थे जब मैं भट्ठा पारसौल में किसानों के पक्ष में लड़ रहा था. मैंने कृषि ऋण की माफ़ी के रूप में सत्तर हज़ार करोड़ की सहायता करवाई.

मैं न्याय के लिए लड़ रहा हूँ. मैं ग़रीब या अमीर या किसानों का पक्षधर नहीं. मैं सिर्फ़ न्याय की बात कर रहा हूँ. अगर आप किसानों के प्रति अन्यायपूर्ण हो तो मैं किसानों की मदद करूंगा. और वैसे अगर आप कार्पोरेट्स के प्रति अन्याय करोगे मैं उनके लिए भी लडूंगा. क्यों मैं अन्याय के ख़िलाफ़ हूँ जब किसी के प्रति ग़लत व्यवहार किया जाए.

सवाल : आपकी सरकार कृषि संकट से कैसे निपटेगी?

जवाब :   मेरा मानना है कि कृषि एक रणनीतिक एसेट है और भारत की एक मूलभूत ताक़त, जो कि भाजपा नहीं मानती. उन्होंने तब यह स्पष्ट कर दिया जन साढ़े तीन रूपये प्रति किसान प्रति व्यक्ति का प्रत्यक्ष कैश ट्रांसफर देने की घोषणा की जो उनकी आर्थिक समस्या को दूर करने में कोई मदद नहीं करेगा. 

हमने जो ऋणमाफ़ी का प्रस्ताव दिया है वह किसानों में आत्मविश्वास भरेगा. लेकिन इस समस्या को हल करने के लिए हमें भारतीय किसानों को तकनीक और वैश्विक बाज़ार से जोड़ना पडेगा.

सवाल : क्या आप यह समझा सकते हैं कि आप इन चुनावों में बेरोज़गारी को एक बड़ा मुद्दा मानते हैं?

जवाब : लाखों युवा लोगों से बातचीत करने के बाद उनकी समस्याएं मेरे सामने बहुत स्पष्ट हुई हैं. बेरोज़गारी 45 सालों में सबसे ऊँचे स्तर है. जहाँ चीन रोज़ 50,000 नई नौकरियाँ पैदा करता है हालिया आंकड़े बताते हैं कि हम रोज़ 27,000 नौकरियाँ खो रहे हैं. सीएमआईई के अनुसार केवल 2017-18 हमने एक करोड़ नौकरियाँ खोईं. यह एक संकट है जिसे राष्ट्रीय इमरजेंसी घोषित किया जाना चाहिए और उसी तरह इसका सामना किया जाना चाहिए. लेकिन प्रधानमंत्री इसे स्वीकार ही नहीं करते. अगर वह इस समस्या को स्वीकार करने से भी इंकार करते हैं तो इसका हल कैसे कर सकते हैं?

सवाल: आपने न्यूनतम आय गारंटी स्कीम की घोषणा की है. आपके मैनिफेस्तों में कौन सी ख़ास योजनाएं और नीतिगत परिवर्तन हैं?

जवाब:  हमारे मैनिफेस्टो में कई नवोन्मेषी और नई राह खोलने वाली योजनाएं हैं. इनमें न्यूनतम आय गारंटी सबसे बड़ी है. यह गरीबी को ख़त्म कर भारत को बदलने की क्षमता रखती है. यह इतने बड़े स्तर पर लागू की जाने वाली योजना है जैसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ..

विचार यह है कि किसी भारतीय को एक न्यूनतम आया से निचले स्तर पर नहीं रहना चाहिए. एक बार जब हम यह स्तर तय कर लेंगे तो सरकार सीधे इससे नीचे रह रहे लोगों को नकदी भेजेगी ताकि हर नागरिक के पास एक न्यूनतम आय हो.

साथ में हम महिला आरक्षण बिल पास करेंगे जिसमें सरकारी नौकरियों में उन्हें ३३ प्रतिशत आरक्षण मिले. हम शिक्षा पर खर्च जीडीपी का छः प्रतिशत करेंगे.

सवाल : बीजेपी में मैं भी चौकीदार नारे के बारे में आप क्या सोचते हैं?

जवाब : पहली बात तो यह कि केवल अमीर आदमी चौकीदार रख सकता है. तो यह नारा इस बात की अभिव्यक्ति है कि मिस्टर मोदी और बीजेपी यहाँ अमीरों की रक्षा के लिए हैं. यह नारा हमारे लोकप्रिय नारे ‘चौकीदार चोर है’ की स्वीकृति भी है जो लोगों के बीच प्रचलित हो गया है और बीजेपी को इसका काउंटर करना पड़ रहा है.  

बहरहाल, उनका उच्च नैतिक पायदान हासिल करने की कोशिश पूरी तरह मूर्खतापूर्ण और बिना विचारे किया गया है. यह धड़ाम से गिर पड़ा है और कथित चौकीदारों द्वारा किये गए घपलों के चलते बहुत ज़बरदस्ती तथा पाखंडपूर्ण लगता है.

मोदी से लेकर पीयूष गोयल, अरुण जेतली, अमित शाह और उनके बेटे जय शाह जैसे जो या तो सीधे सीधे या फिर अपने दोस्तों और परिवारों के जरिये देश को लूटने वालों की सूची बहुत लम्बी है लेकिन अब चौकीदार बनने का नाटक कर रहे हैंलोगों को मूर्ख नहीं बनाया जा सकता क्योंकि अपने दिल में हर भारतीय जानता है कि देश का चौकीदार चोर है.

सवाल: क्या आप मोदी युग में एक नई परिघटना को देख पा रहे हैं जो कांग्रेस के लिए बेहतर है यानी गैरकांग्रेसवाद जैसी कोई बात नहीं रह गई है. जो लोग कांग्रेस को पसंद नहीं करते थे, जैसे कि कम्युनिस्ट, वे भी राहुल गाँधी को समर्थन देने को मजबूर हैं. मोदी-शाह जोड़ी को देखते हुए बौद्धिक वर्ग के कई लोग कांग्रेस को लेकर उठने वाले कई सही सवालों को भी नजरअंदाज़ करते हैं.

जवाब: मोदी और बीजेपी ने ही ‘कांग्रेस-मुक्त’ भारत का हल्ला मचाना शुरू किया था. यह बेअसर रहा क्योंकि लोगों ने महसूस किया कि मोदी सरकार किस बुरी तरह असफल हुई है.

कितना भी झूठा प्रचार किया गया हो, लेकिन यह बात तो साबित हो चुकी है कि यूपीए के समय अर्थव्यवस्था कहीं ज्यादा मजबूत थी. लोगों में इतनी असुरक्षा और डर नहीं था. किसानों, जवानों और महिलाओ की स्थिति बेहतर थी.

एक बार जब लोगों ने यह महसूस कर लिया तो फिर गैरकांग्रेसवाद का कोई आधार नहीं रह गया. यह जरूर है कि राज्यों में या राष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसी पार्टियाँ हैं जो कमज़ोर कांग्रेस देखना पसंद करती हैं और कांग्रेस के मजबूत होने से डरती हैं. यह राजनीति की सच्चाई है

सवाल: बीजेपी ने त्रिपुरा और हरियाणा में सरकार बना ली जहाँ वह परिदृश्य में ही नहीं थी. वह बंगाल में भी तख्तापलट का सपना देख सकती है. कांग्रेस में ऐसी ‘किलर इन्स्टिंक्ट’, ऊर्जा और जुनून क्यों नहीं है?

जवाब: आप ने ‘किलर इन्स्टिंक्ट’ शब्द का इस्तेमाल बिलकुल ठीक किया है. वे किसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया या जनभावना की कोई कोई परवाह नहीं करते. वे सत्ता हड़पने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि सरकार बनाने के लिए कितनी बेईमानी उन्होंने की.

कांग्रेस में जोश भी है और ऊर्जा भी। लेकिन हम जनता की बात सुनने में भरोसा करते हैं. हम बीजेपी की तरह नहीं हैं जिसने गोआ में सत्ता हड़पने के लिए पूरी तरह अनैतिक हथकंडे अपनाए.

सवाल: आपने एक बार कहा था कि आप पार्टी में जज की भूमिका में रहेंगे न कि किसी के वकील की तरह काम करेंगे। क्या आप पार्टी के अंदर योग्यता आधारित न्यायपूर्ण सिस्टम बना पाए?

जवाब: हम इस दिशा में बढ़ रहे हैं. कई चीजें की गई हैं लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है.

सवाल: तो भारत और राहुल गाँधी का भविष्य क्या होगा अगर नरेंद्र मोदी दोबारा चुनाव जीत गए?

जवाब: वे जीतने नहीं जा रहे हैं। नहीं जीतेंगे.

सवाल: मान लीजिए, जीत गए तो?

जवाब: नहीं जीतेंगे. आपको समझना चाहिए कि मोदी घृणा की अभिव्यक्ति हैं. तो उन्होंने किया ये कि समाज में अगर गुस्सा है तो उसे और घना कर दिया.

मैं भारत को जितना जानता हूँ, क्रोध भारत का मूल भाव नहीं है। कुछ समय के लिए तो ऐसा हो सकता है, लेकिन भारत की बुनियाद में प्रेम और करुणा है। आप हमारे किसी भी धर्म या दर्शन की ओर देखें, आपको पता चलेगा कि क्रोध हमारे स्वभाव में नहीं है.

क्रोध आपको कोई समाधान नहीं देता। कभी नहीं.

THE TELEGRAPH से साभार।

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