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गुजरात में व्यापार के नाम पर ठगी गई उक्रेनी महिला की गुहार- सरकार मेरे पैसे वापस दिलवाए!

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उक्रेन की एक महिला अपनी माँ के साथ भारत में दर-दर ठोकरें खाने को मजबूर है क्योंकि प्रधानमंत्री के गृहराज्य गुजरात के एक व्यापारी ने उसके साथ भारी धोखाधड़ी कर दी है और इस महिला की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

उक्त महिला अनसतेसिया अकिमोवा ने 23 दिसम्बर को दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस कर के अपनी आपबीती मीडिया के सामने रखी लेकिन अब तक मीडिया में भी उसकी घटना को पर्याप्त जगह नहीं मिल सकी है।

भारत सरकार लगातार विदेशों से व्यापार बढ़ाने की बात कहती रही है। भारत के कृषि उत्पाद के बारे में सुनकर अनसतेसिया अकिमोवा भारत में व्यापार करने के लिए यूक्रेन से आई। उन्होंने प्रधानमन्त्री के प्रदेश गुजरात के राजकोट में ओलो इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट के खोड़ाभाई नागाजी भाई रमानी से काबुली चना उक्रेन भेजने का सौदा किया था। इनका अंतर्राष्ट्रीय कृषि खाद्य बिजनेस उक्रेन में है। इन्होंने 1 करोड़ 10 लाख रुपए की पेमेंट माल की सप्लाई के लिए की थी, लेकिन राजकोट के व्यापारी खोड़ाभाई ने काबुली चना सप्लाई करने के बजाय जाली कागज बना कर दे दिया और बता दिया कि माल भेज दिया है और पैसे गटक गए।

अनसतेसिया अकिमोवा ने कहा कि उन्होंने इसकी शिकायत DGFT और राजकोट पुलिस से की। खोड़ाभाई की कंपनी ओलो इंपोर्ट एंड एक्सपोर्ट DGFT में रजिस्टर्ड भी है। राजकोट पुलिस ने व्यापारी को गिरफ्तार भी किया, लेकिन थोड़े दिनों बाद उसको जमानत मिल गयी पर अभी तक पैसे की रिकवरी नहीं हुई है।

अनसतेसिया ने कहा, “चूंकि उक्त लोगो ने भारत सरकार द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र दिखा कर हमें ठगा है, हमारी भारत सरकार से गुजारिश है कि व्यापारी से पैसे वापस दिलाए। हमने इसकी शिकायत उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले अन्य सस्थाओं में, केंद्रीय जाँच ब्यूरो एवं प्रवर्तन निदेशालय में भी किया है, परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई है।” उन्होंने कहा कि हम भारत में व्यापार करने आये थे और अगर हमारा पैसा रिकवर नहीं होगा तो आखिर हम कैसे व्यापार करेंगे।

खोड़ाभाई के खिलाफ राजकोट पुलिस में पहले से भी कई शिकायतें दर्ज हैं और उक्त लोग कई विदेशियों के साथ ऐसा कर चुके हैं। भारत सरकार द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र उनके पास अभी भी है, जिसके बल पर वो लगातार धोखाधड़ी का काम कर रहे है। उक्रेन दूतावास ने उक्त व्यापारी महिला को विदेश मानती सुषमा स्वराज से भी मिलने को कहा है परन्तु उनकी लाख कोशिशों के बाद भी अधिकारी मिलने का कोई समय नहीं दे रहे हैं और महिला व्यापारी अपनी मां के साथ सभी जगहों पर धक्के खा रही है।

सवाल यह है कि अगर भारत की साख विदेशों में इस तरह बनती है तो मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया का नारा विफल ही होगा क्योंकि सरकार नारे तो लगा रही है परन्तु वास्तविक रूप से धरातल पर कुछ भी नहीं हो रहा है।


प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित 

1 COMMENT

  1. João Pietro da Cruz

    A procura de remodelações em Janeiro é média.

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