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“बस्तर की चालीस लाख जनता में मेरा विरोध करने वाले पांच से ज्यादा लोग नहीं हैं”

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मीडियाविजिल संवाददाता


दिल्‍ली के पत्रकारिता जगत में 20 मई शनिवार का दिन हंगामाखेज़ रहा। इस दिन भारतीय जनसंचार संस्‍थान यानी आइआइएमसी में ”राष्‍ट्रीय पत्रकारिता” पर एक सेमिनार संस्‍थान व मीडियास्‍कैन नामक संस्‍था के संयुक्‍त प्रयास से रखा गया जिसका आरंभ वैदिक रीति के यज्ञ से हुआ। कार्यक्रम का शुरुआती विरोध संस्‍थान के छात्रों की ओर से यज्ञ को लेकर आया, लेकिन जब यह बात खुली कि कार्यक्रम में बस्‍तर के कुख्‍यात आइजी रहे एसआरपी कल्‍लूरी भी आ रहे हैं, तो कई संगठन अचानक सक्रिय हो गए और एक तगड़ा विरोध प्रदर्शन शाम चार बजे तक आइआइएमसी के गेट पर चला, जब कल्‍लूरी बोल ही रहे थे।

पत्रकारिता संस्‍थान में पत्रकारिता पर कार्यक्रम में एक पूर्व आइजी के बोलने की बात हालांकि ऐसे पत्रकारों को भी हज़म नहीं हुई जो कार्यक्रम का हिस्‍सा थे। कल्‍लूरी पौन घंटे बोले और अपने ठंडे मज़ाक से उन्‍होंने महफि़ल लूट ली। उनके आते ही ‘जय श्री राम” और ”भारत माता की जय” के नारे सभागार में लगे, उसके बाद उन्‍होंने बोलना शुरू किया तो पौन घंटे तक श्रोता सांस बांधे सुनते रहे- श्रोता मतलब वह समूह जो कल्‍लूरी को नायक मानता है।

कल्‍लूरी के व्‍याख्‍यान से लेकर समूची भाव-भंगिमा पर हम आगे कुछ सामग्री देंगे, लेकिन फि़लहाल इस व्‍याख्‍यान को अविकल सुना जाए:

 

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