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भूमि अधिकार आंदोलन के बैनर तले किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष का साझा संकल्प

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नई दिल्ली | 21 मार्च 2018: भूमि अधिकार आन्दोलन द्वारा कृषि संकट, पशु अर्थव्यवस्था पर हमले तथा मुस्लिम, दलित और अल्पसंख्यकों की भीड़ द्वारा हत्याओं के खिलाफ राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन देश भर से आये विभिन्न जनसंगठनों और किसान संगठनों ने देश की ग्रामीण क्षेत्रों की भयावह स्थिति को सामने रखते हुए केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा मुंबई किसानों के लॉन्ग मार्च के चलते किसानों के बीच पैदा हुए उत्साह का उल्लेख बार-बार किया। वक्ताओं ने यह विश्वास व्यक्त किया कि भूमि अधिकार आन्दोलन जिस तरह सरकार को भूमि अधिग्रहण बिल को पारित करने से रोकने में कामयाब रहा था उसी तरह गाय की खरीद बिक्री को लेकर सरकार द्वारा बनाये गए कानून को बदलने में कामयाब होगा। पहले सत्र का संचालन बीजू कृष्णन तथा दूसरे सत्र का संचालन विमल भाई ने किया। पहले सत्र में प्रेम सिंह गहलावत, अखिल भारतीय किसान महासभा, जयकरण सिंह, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन आदि साथियों ने अपने विचार रखे।

“मेवात को जानिए” सत्र में मौलाना हनीफ और सिफत मेनेजर ने मेवात की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति पर अपनी बात रखी। दूसरे सत्र में आल इंडिया यूनियन आफ फारेस्ट वर्किंग पीपल के अशोक चौधरी, सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस की तीस्ता सीतलवाड़, माइनॉरिटीज कोरडीनेशन कमिटी के मुजाहिद नफीस, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर संगठन के सत्यवान जी, अग्रगामी किसान सभा के शिवनारायण जी, आदिवासी मूलनिवासी अस्तित्व रक्षा समिति की दयामनी बारला, लोक शक्ति अभियान के सामंत रे, विलास भोंगाड़े, जेएनयु के प्रोफेसर विकास रावल, प्रीत सिंह, छगन चौधरी तथा इंसाफ के वीरेंद्र विद्रोही ने अपने विचार रखे। कामरेड रमेश पाल ने क्रांति गीत प्रस्तुत किये।

सम्मेलन में हरियाणा और राजस्थान में गोरक्षा के नाम पर की गयी हत्याओं की जाँच रिपोर्ट भूमि अधिकार आन्दोलन द्वारा जारी की गयी तथा जाँच रिपोर्ट की सिफारिशों को सरकार से लागू करने की मांग की गयी जिसमें गोरक्षा के नाम पर हुए सभी हत्याओं के दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने, पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रूपया देने आदि सिफारिशें की गयी। सम्मेलन को सांसद बदरुद्दुजा खान, के. के. रागेश ने सम्बोधित करते हुए जांच दल के अनुभवों को साझा किया।

सभा की शुरुआत करते हुए और भूमि सुधार आन्दोलन के बारे में बताते हुए हन्नान मोल्लाह ने कहा कि भूमि अधिकार आन्दोलन में जन संगठनों, सामाजिक संगठनों और जन आंदोलनों का समावेश है। मोदी सरकार के आने के बाद से किसान विरोधी जो नीतियाँ बनाने की शुरुआत हुई, उसके बाद यह संगठन खड़ा किया. 2013 में जो भूमि अधिकार कानून बना, मोदी सरकार ने उसे बदलने की कोशिश की। इसके विरोध में देश भर में आन्दोलन हुए। इसके बाद 2015 में भूमि अधिकार आन्दोलन का गठन हुआ। मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून पास करने की कोशिश की, लेकिन पास नहीं करा सके। 70 साल में पहली बार कोई सरकार किसानों के सामने झुकी। राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारें झुकी। राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों में भूमि अधिकार आन्दोलन की इकाइयाँ खड़ी हुई है। अन्य राज्यों में भी इकाइयाँ खड़ी हो रही रही हैं। धीरे-धीरे पूरे देश में इकाइयाँ खड़ी करनी हैं। राज्य सरकारों ने किसानों के खिलाफ तमाम नीतियाँ बनाने का काम किया है, किसान इनसे परेशान है। किसानों का बहुत नुकसान हो रहा है। भूमि अधिकार आन्दोलन इनका विरोध करता है। गौरक्षा के नाम पर जनता को मारा जा रहा है। देश भर में जहाँ भी भूमि अधिग्रहण की घटनाएँ हो रही हैं हमारे कार्यकर्त्ता वहाँ पहुँचते है और उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं। गौरक्षा की घटनाओं की जांच के लिए एक जांच दल बनाया गया था, वह जाँच करने गया था और जो जाँच रिपोर्ट बनाई है वह रिलीज की गयी।

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इसके बाद देश के कई हिस्सों में गौ-रक्षकों की हिंसा के शिकार परिवारों के जो सदस्य यहाँ पहुंचे थे, उन्होंने आपबीती बताई। झारखण्ड से आए आज़ाद खान ने कहा कि सरकार ने हमारी कोई सहायता नहीं की। पुलिस से सहयोग माँगा नहीं मिला। सरकार ने भी मुआवजा देने की बात कही थी लेकिन नहीं मिला। गढ़वा झारखण्ड से गौरक्षा के शिकार रमेश मिंज की पत्नी अनीता मिंज और रिआजुद्दीन के पिता रोहम अली और माँ रोमेना खातून और अबू हनीफा के पिता फैजुल और तालीम की माँ शम्मो ने बात रखी। कुछ परिवारजन तो रोते-रोते अपनी बात भी नहीं रख पाए।

एक वक्ता ने कहा कि अंग्रेजों के समय आदिवासियों को अपराधी माना जाता था, आज मुसलमानों को अपराधी माना जाता है। जब उमर की हत्या की गयी तो कोशिश करने पर भी रपट नहीं लिखी गयी। 3 बार पुलिस के पास गए। पहलू खान दूध की गाय लेकर जा रहा था। गौ-रक्षकों के नाम पर उसके पैसे भी छीन लिए गाय भी छीन ली, लाठी डंडो से मारा। अलवर में देश की सबसे अच्छी गाय मिलती है।

किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ सुनीलम ने कहा कि सरकार किसान, किसानी और गाँव नष्ट करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को हर गाय पर न्यूनतम 100 रुपये दिन की मदद देनी चाहिए, ताकि किसान सूखे, अतिवृष्टि बाढ़, तथा दूध न देने के स्थिति में भी गाय को पाल सके। उन्होंने कहा कि गोशालाओं में तमाम भ्रष्टाचार की खबरें अखबारों में छपती हैं जिनकी उच्च स्तरीय जांच की जाना जरुरी है। उन्होंने दुग्ध उत्पादों के आयात पर प्रतिबन्ध लगाने के मांग की। उन्होंने बताया कि 28 मार्च को दिल्ली में कर्जा मुक्ति एवं लागत से डेढ़ गुना दाम को लेकर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा तैयार बिलों पर सुझाव हेतु अंतिम चर्चा के लिए बैठक बुलाई गयी है, ताकि बिलों को लेकर राष्ट्रव्यापी किसान आन्दोलन किया जा सके। उन्होंने देश भर में किसानों की लूट के खिलाफ मंडियों में किसानों द्वारा चलाए जा रहे एम.एस.पी. सत्याग्रह की जानकारी भी दी।

सभा दूसरे दिन भी जारी रहेगी और उसमें मेधा पाटकर, कनचा इलहा, अतुल अनजान एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ता अपनी बात रखेंगे। दोपहर के सत्र में सभी विपक्षी पार्टियों के नेता इस मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे, इसमें मुख्य रूप से सीताराम येचुरी, शरद यादव, सुधाकर रेडी, मनोज झा, नीरज शेखर, सूखेंदु शेखर राय, देबब्रत विश्वास, कनिमोडि, विजयसई रेडी, केसव राउ, दानिश अली, असित भट्टाचार्य एवं अन्य शामिल होंगे ।

कृष्णा प्रसाद, संजीव, श्वेता, मधुरेश

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