Home आयोजन युद्धोन्माद के ख़िलाफ़ अमन की संस्कृति बनाएगी IPTA

युद्धोन्माद के ख़िलाफ़ अमन की संस्कृति बनाएगी IPTA

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भोपाल।  17 फरवरी, 2019 

 भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की राष्ट्रीय समिति की बैठक 16 और 17 फरवरी, 2019 को भोपाल में गाँधी भवन में सम्पन्न हुई। बैठक में पुलवामा में हुए आतंकी हमले की भर्त्सना करते हुए हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में शामिल सदस्यों ने दुःख की इस घड़ी में शहीदों एवं घायल सैनिकों के परिवारो के साथ एकजुटता व्यक्त की तथा घायल सैनिकों के शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएँ दीं और देश में अमन का माहौल कायम करने के प्रयास का संकल्प लिया गया।

इस मौक़े पर 17 फरवरी को बैठक के अंत मे इप्टा के राष्ट्रीय सचिव और अर्थशास्त्री मनीष श्रीवास्तव (दिल्ली) और प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी (इंदौर) ने कश्मीर हिंसा और उसके बाद देश में बन रहे हालात पर प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिसका इप्टा  की राष्ट्रीय कार्यसमिति और प्रगतिशील लेखक संघ के मौजूद सदस्यों ने पूर्ण समर्थन किया। प्रस्ताव के अनुसार इप्टा तथा प्रलेस का स्पष्ट मत है कि इस हमले की साजिश न सिर्फ़ राष्ट्रीय सुरक्षा,एकता और अखंडता को खतरे मे डालने के लिए थी बल्कि इससे देश के शान्ति और सद्भाव के ताने-बाने को भी चोट पहुँचाने का प्रयास किया गया है। प्रस्ताव में यह दुःख  भी व्यक्त किया गया है कि संकट के इस समय कुछ देशविरोधी, फ़िरकापरस्त एवं युद्धोन्मादी तत्व देश के विभिन्न हिस्सों मे रह रहे कश्मीरियों को निशाना बना कर एक तरह से आतंकवादी  मन्सूबों को मदद पहुँचा रहे हैं। 

प्रस्ताव में कहा गया है कि दुःख और संकट के समय हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि देश के बहादुर सिपाही न केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा में बल्कि देश में शान्ति और सद्भाव  की  रक्षा में भी अपनी जान की बाजी लगाते हैं। इस शान्ति और  सद्भाव को कायम रख कर ही शहीदो का सच्चा सम्मान किया जा सकता है। प्रस्ताव में  स्पष्ट संकेत किया गया है कि कश्मीर हमले के बाद देश और विदेश की कॉर्पोरेट आर्म्स लॉबी द्वारा युद्ध को भड़काने तथा संघ गिरोह द्वारा इसके राजनीतिक इस्तेमाल की कोशिशें की जा रही हैं। एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है जो निन्दनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। यह नहीं भूलना चाहिए कि युध्द ने हमेशा मानवता का नुकसान ही किया है। युद्ध ने लाखों निर्दोष लोगों की जाने लीं हैं और लाखों को जीवन भर के लिए अपंग बना दिया। युध्द समस्या का समाधान नहीं है बल्कि युद्ध खुद एक समस्या है। केन्द्र व राज्य सरकारों का यह दायित्व है कि वे शान्ति और सद्भाव बिगाड़ने की हर साज़िश को नाकाम करें तथा अल्पसन्ख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। प्रस्ताव में भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देशों के नागरिकों से अपील की गयी है कि हमें उन्माद से बचने का हर सम्भव प्रयास करना होगा। 

इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश और प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने अपने सन्देश में कहा कि किश्वर नाहीद, फरीदा ख़ानम, मंटो, हबीब जालिब, कैफ़ी आज़मी, फैज़ अहमद फैज़, उस्ताद बिस्मिल्ला खान, मेहदी हसन, ग़ुलाम अली, बेगम अख़्तर, नूरजहाँ, मोहम्मद रफ़ी, नौशाद, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, खान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान और भी न जाने कितने कलाकार और विद्वान जितने भारत के हैं उतने ही पाकिस्तान के और जितने पाकिस्तान के हैं, उतने ही हिंदुस्तान के। हमें अपनी साझा संस्कृति को इंसानियत और अमन की संस्कृति बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। 

बैठक में इप्टा को विस्तार देने और मजबूती देने के लिए देश के चार हिस्सों में चार क्षेत्रीय सम्मलेन किए जाने का फैसला लिया गया। दक्षिणी राज्यों का सम्मेलन केरल में होगा, हिन्दी भाषी राज्यों का सम्मेलन छत्तीसगढ़ में किया जायेगा जिसमें महाराष्ट्र और गुजरात भी शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों का सम्मेलन गोवाहाटी या कोलकाता में एवं चौथा सम्मेलन पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और हरियाणा को जोड़कर जम्मू में होना प्रस्तावित है।

देश में खेती के विकराल संकट और ग्रामीण भारत की समस्याओं को केंद्र में रखकर इप्टा की एक सप्ताह की राष्ट्रीय कार्यशाला दिल्ली में किया जाना तय हुआ। जिसका संयोजन जया मेहता, विनीत तिवारी, मनीष श्रीवास्तव और नूर जहीर करेंगे और जिसमें देश के हर राज्य से गीतकार, लेखक और नाटककार शरीक होंगे। बैठक में ये भी तय किया गया कि इप्टा के पूर्व अध्यक्ष रहे सुविख्यात शायर कैफ़ी आज़मी, उर्दू की प्रसिद्द कथाकार रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर, वरिष्ठ नाट्य आलोचक, रंगकर्मी और इप्टा के प्रारम्भिक दिनों के साथी नेमीचंद जैन तथा इप्टा से गहरे जुड़े रहे महत्त्वपूर्ण इतिहासकार प्रोफेसर रामशरण शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष को देश के विभिन्न प्रमुख केंद्रों में मनाया जाएगा। इसी क्रम में लखनऊ में एक राष्ट्रीय सम्मेलन साझी संस्कृति, साझी शहादत और साझी विरासत आयोजित किया जायेगा। “नफरत के खिलाफ एकजुट कलाकार” के जरिये 2 व 3 मार्च 2019 को कलाकारों के देशव्यापी प्रदर्शन में इप्टा भी अपनी भरसक भागीदारी दर्ज करवाएगी। बैठक में शामिल हुए इप्टा के प्रशंसक और शुभचिंतक तथा केरल से राजयसभा संसद बिनॉय विस्वम ने कहा कि देश में मौजूदा राजनीतिक – सामाजिक माहौल देखते हुए देश को सम्प्रदायवादी फासीवाद से बचाने की लड़ाई में इप्टा की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। नए नाटक, नई तकनीक के साथ जनता तक पहुँचने वाले कलारूपों को अपनाकर सही विचार को जनता के बीच ले जाने का काम इप्टा जो जल्द से जल्द करना होगा। टी वी बालन ने बताया कि केरल इप्टा के एक एकपात्रीय नाटक “शवयात्रा” के पिछले कुछ वर्ष में 1000 से अधिक मंचन हो चुके हैं।  

बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने इप्टा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य और प्रलेस के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर नंदिनी सुन्दर, जेएनयू की प्रोफ़ेसर अर्चना प्रसाद, माकपा छत्तीसगढ़ के सचिव संजय पराते, भारतीय महिला फेडरेशन की नेत्री और गुफड़ी गाँव की सरपंच मंजू कवासी और नामा गाँव के निवासी मंगलाराम कर्मा को हत्या तथा यूएपीए के झूठे आरोपों से मुक्त होने और एसआईटी की जांच में निर्दोष पाए जाने पर बधाई दी और वंचितों के  की आवाज़ उठाने की खातिर जेलों में डाले गए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, कवी, लेखक, कलाकारों को क़ैद किये जाने के खिलाफ रोष प्रकट किया ।  इप्टा की 75वीं  सालगिरह के समापन के पटना में आयोजित भव्य कार्यक्रम हेतु राष्ट्रीय कार्यसमिति ने बिहार इप्टा, श्री तनवीर अख्तर, फ़िरोज़ अशरफ खान, और उनके सभी साथियों की तारीफ की।    

यह साल रज़िया सज्जाद ज़हीर का जन्म शताब्दी वर्ष है जिसे देश भर की इप्टा एवं प्रलेस की इकाईयों में मनाया जा रहा है। 16 फरवरी की शाम को इसी कड़ी में भोपाल की प्रलेस एवं इप्टा इकाई की सहभागिता में रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर की रचनाओं और संस्मरणों को याद करते हुए उनकी लिखी दो कहानियों “दोशाला” एवं “यस सर” का प्रभावी नाट्य मंचन किया गया, जिसका निर्देशन दिनेश नायर ने किया। तत्पश्चात राकेश ने 1953 में ईदगाह नाटक पर लगे मुकदमे का प्रसंग सुनाया जिसका नाट्य रूपांतरण रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर एवं निर्देशन अमृतलाल नागर ने किया और विनीत तिवारी ने रज़िया सज़्ज़ाद ज़हीर के लेखन को जीवन के मामूली किरदारों के भीतर छिपे गैर मामूली गुणों को उद्घाटित करने वाला ईमानदार और धड़कं भरा गद्य बताया।  राकेश ने “नमक” और विनीत ने “सुतून” कहानी की चर्चा की। नूर ज़हीर ने उनके संस्मरणों पर लिखी किताब “स्याही की एक बूँद” से सज़्ज़ाद ज़हीर, मज़ाज़ लखनवी और अमृता प्रीतम से जुड़े ऐसे मार्मिक संस्मरण सुनाये कि लोगों की आँखें भीग गयीं। 

17 फरवरी की शाम मुंबई इप्टा के सचिव और टी व्ही-फिल्म अभिनेता मसूद अख्तर ने एम एस सथ्यु के जीवन पर केंद्रित तथा इप्टा के विभिन्न आयाम और पहलुओं को उजागर करते एक घंटे की अवधि के अपने बनाये वृत्तचित्र “कहाँ-कहाँ से गुजरा” का प्रदर्शन किया।  इस वृत्तचित्र में एम एस सथ्यू की बनाई हुई फिल्मों “गरम हवा”, “कहाँ-कहाँ से गुजर गए”, “सूखा” आदि के अंश तथा मृणाल सेन, श्याम बेनेगल, ए के हंगल, हबीब तनवीर आदि सथ्यू के समकालीनों के संस्मरण बहुत रोचक अंदाज में प्रस्तुत किये गए। 

उक्त बैठक में वरिष्ठ रंगकर्मी और अभिनेता तथा इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रनबीर सिंह (जयपुर), वरिष्ठ रंगकर्मी श्री तनवीर अख्तर, फ़िरोज़ अशरफ ख़ान (पटना), टी.वी. बालन  (कालीकट), के एल लक्ष्मीनारायणा (तेलंगाना), एस के गनी, जैकब (आंध्र प्रदेश), संतोष डे (उत्तर प्रदेश), बालचंद्रन (अलप्पुड़ा), अमिताभ चक्रवर्ती (कोलकाता), मसूद अख्तर (मुंबई), वरिष्ठ कवि श्री राजेश जोशी (भोपाल), लेखिका – रंगकर्मी और इप्टा की राष्ट्रीय सचिव नूर ज़हीर (दिल्ली), वेदा राकेश (लखनऊ), हिमांशु राय, वसंत काशीकर (जबलपुर), वरिष्ठ कवि कुमार अम्बुज (भोपाल), वरिष्ठ रंगकर्मी निसार अली , उषा आठले, अजय आठले, राजेश श्रीवास्तव, मृणमय चक्रवर्ती, (छत्तीसगढ़), अनिल रंजन भौमिक (इलाहाबाद), संजय गुप्ता (जम्मू), वरिष्ठ रंगकर्मी, कवि और इप्टा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हरिओम राजोरिया एवं सीमा (अशोकनगर),  शिवेंद्र शुक्ला (छतरपुर), सारिका श्रीवास्तव (इंदौर), योगेश दीवान (होशंगाबाद), राकेश दीवान (भोपाल), शैलेन्द्र शैली, दिनेश नायर, अनिल करमेले, ईश्वर सिंह दोस्त, आरती, रविंद्र स्वप्निल, सचिन श्रीवास्तव, सत्यम पाण्डे, संदीप कुमार, पूजा सिंह, दीपक विद्रोही, श्रद्धा श्रीवास्तव, प्रेम गुप्ता, अनुलेख त्रिवेदी, हर्ष अग्रवाल, विकास शर्मा, अम्बुज ठाकुर, पवित्र नसकर, अभिषेक ठाकुर  (भोपाल) एवं अन्य अनेक कवि, कहानीकार, नाटकककार, रंगकर्मी मौजूद थे।

रिपोर्ट प्रस्तुति – विनीत तिवारी एवं सारिका श्रीवास्तव 

1 COMMENT

  1. Unfortunately revolutionary even progressive cultural movements almost died since long
    Revisionist parties naturally have no interest in promoting such things.

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