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बहुजनों का भारत बंद आज, SC/ST कानून के खिलाफ़ फैसला देने वाले जज के पास रिव्यु पेटिशन

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Photo Courtesy NDTV.com

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किए गए परिवर्तन के खिलाफ बहुजनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया है। दलित संगठनों की ओर से बुलाए गए इस बंद को देशव्यापी समर्थन मिल रहा है।

पंजाब सरकार ने एहतियात के तौर पर सूबे की सभी शिक्षण संस्थाओं को बंद करने का फैसला किया है। बंद के मद्देनजर जगह-जगह सुरक्षा बलों के जवानों को तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना को अलर्ट कर दिया गया है।

केंद्र सरकार ने सोमवार को मामले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है। केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इसकी जानकारी दी। एएनआई को दिए गए एक बयान में उन्होंने इसकी पुष्टि की। इसके पहले केंद्र सरकार में शामिल राम विलास पासवान की पार्टी एलजेपी ने भी सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दाखिल की थी। इसको लेकर बीजेपी के भीतर दलित सांसदों की भी तीखी प्रतिक्रिया आयी है। कुछ सांसद तो प्रेस के सामने अपनी इस नाराजगी को जाहिर कर चुके हैं। शायद यही वजह है कि केंद्र को पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल इस बारे में लिखते हैं:

छत्तीसगढ़ से भी बंद के समर्थन में खबरें आ रही हैं। सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी ने भी बंद का समर्थन किया है। और इसमें सक्रियता पूर्वक भाग लेने का फैसला किया है। जबकि एससी इम्प्लाइज फेडरेशन समेत तमाम दलित संगठन खुलकर बंद के समर्थन में आ गए हैं

गुजरात में भी बंद की तैयारियों को लेकर रिपोर्ट आ रही हैं। वहां इसी मुद्दे पर एक यात्रा निकली है जो आज अहमदाबाद पहुंच गयी है। और कल गांधीनगर में पहुंचकर उसके नेता और कार्यकर्ता बंद में शामिल हो जाएंगे।

दलित नेता और गुजरात विधानसभा में विधायक जिग्नेश मेवानी ने बंद को सफल बनाने के लिए अलग से अपील की है। उन्होंने अहमदाबाद समेत तमाम शहरों को बंद करने के लिए अभियान चलाया है।गौरतलब है कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न निवारण कानून के बेजा इस्तेमाल का संज्ञान लेते हुए कहा कि अगर इस कानून के तहत कोई शिकायत दर्ज की जाती है तो सरकारी कर्मचारियों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी को गिरफ्तार करने से पहले एसपी स्तर के एक अफसर से मामले की जांच करानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला महाराष्ट्र सरकार द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनाया।


साभार-जनचौक.काम