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करगिल जीतने पर जवानों ने बोफ़ोर्स को चूमकर नारा लगाया- ‘राजीव गाँधी ज़िंदाबाद..!’

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चंचल

समाजवादी आंदोलन का अचानक भसक जाना हम जैसों की कमर ही नही तोड़ दी , बल्कि समूची सियासत की ही छीछालेदर कर दी । सियासत के फलने फूलने और असल अमल तक पहुचने की सीढ़ी एक ही है पर डांडे तीन है । प्रश्न , जिज्ञासा, और कुतूहल । आज यह किसी दल में नही है यहां तक कि अब कांग्रेस भी इससे हटने लगी है , थोड़ा ही सही तब भी कांग्रेस से सवाल पुछाजा सकता है । कल करगिल दिवस मनाया गया । जाहिर है कि बोफोर्स की चर्चा चलेगी । हम कारगिल जीत चुके थे उसे यूँ कह सकते हैं कारगिल वापिस पा गए थे । हर तरफ खुशी थी । हम जार्ज के घर बैठे थे । अशोक सुब्रमनियम एक क्लिपिंग लेकर आया और जार्ज को दिया । प्रिंटर का नोट था । जार्ज ने देखा और पढ़ कर मुस्कुरा दिए और टेबुल पर रख दिये । हमने उसे पढा ।

‘जीत की खुशी में जवानों ने बोफोर्स को चूमा और बोफोर्स के साथ राजीव गांधी जिंदाबाद के नारे लगाए ।’ हमने जार्ज से पूछा – आपने यह देखा ? जार्ज हँसे । गलत नही है । बोफोर्स ने बहुत बड़ा काम किया है । नीचे से ऊपर मार करना और उन्हें पीछे फेकना बोफोर्स ही कर सकता था ।

सीन 2

और पीछे चलिये । वी पी सिंह विद्रोह कर चुके थे या यूँ कहिए कांग्रेस से निकाले जा चुके थे । कुल तीन लोग थे जो वी पी का साथ दे रहे थे । संतोष भारती , राज बब्बर और चंचल । बाकी लोग बाद में आये । हम जार्ज के साथ बैठे थे , नैनीताल से प्रताप भैया आये थे , बहुत उत्साहित थे । कांग्रेस के खिलाफ , राजीव जी के खिलाफ बोले जा रहे थे , जार्ज सुन रहे थे फिर अचानक जार्ज बोले – फंस गया लड़का ( राजीव गांधी ) प्रणव चाहते तो जवाब दे सकते थे लेकिन राजीव बोल नही पा रहा । कौन नही जानता कि रक्षा सौदे में कमीशन नही चलता ? सब को मालूम है । और बात खत्म हो गई ।

 

सीन 3 

इलाहाबाद सिविल लाइन , राजा मांडा वी पी सिंह का ऐश महल , खाने की टेबल पर संतोष भारती , डॉ संजय सिंह , योगेश मिश्र खमरिया , राम सिंह सुल्तान पुर और यह खादिम नास्ता कर रहे है, रानी सीता देवी जी खुद परोस रही हैं । संतोष ने धीरे से सीता जी को कुछ बोला और उसके तुरत बाद सीता जी हमारी तरफ मुड़ी और बोली – चंचल ! सब आ गए ,अभी तक जार्ज का कुछ पता ही नही , उन्हें तुम्ही बुला सकते हो । फिर डॉ संजय सिंह पीछे पड़ गए , बुलावो यार । पूरा अपोजीशन यहां आ चुका है केवल जार्ज नही हैं । हॉइ कोर्ट के नामी वकील बाद में एटॉर्नी भी बने , ये डी गिरी के यहां हम गए । जार्ज को फोन किया किसी तरह तैयार हुए एवज में वी पी पर जो बोले वह यहां असामयिक है ।

(चंचल जी, वरिष्ठ पत्रकार और चित्रकार हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं।)

 



 

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