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डॉ.आंबेडकर के 49वें जन्मदिन की धूम का आँखों देखा हाल

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डॉ.आंबेडकर के आंदोलन की कहानी, अख़बारों की ज़़ुबानी – 40

पिछले दिनों एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में डॉ.आंबेडकर को महात्मा गाँधी के बाद सबसे महान भारतीय चुना गया। भारत के लोकतंत्र को एक आधुनिक सांविधानिक स्वरूप देने में डॉ.आंबेडकर का योगदान अब एक स्थापित तथ्य है जिसे शायद ही कोई चुनौती दे सकता है। डॉ.आंबेडकर को मिले इस मुकाम के पीछे एक लंबी जद्दोजहद है। ऐसे मेंयह देखना दिलचस्प होगा कि डॉ.आंबेडकर के आंदोलन की शुरुआत में उन्हें लेकर कैसी बातें हो रही थीं। हम इस सिलसिले में हम महत्वपूर्ण  स्रोतग्रंथ  ‘डॉ.अांबेडकर और अछूत आंदोलन  का हिंदी अनुवाद पेश कर रहे हैं। इसमें डॉ.अंबेडकर को लेकर ख़ुफ़िया और अख़बारों की रपटों को सम्मलित किया गया है। मीडिया विजिल के लिए यह महत्वपूर्ण अनुवाद प्रख्यात लेखक और  समाजशास्त्री कँवल भारती कर रहे हैं जो इस वेबसाइट के सलाहकार मंडल के सम्मानित सदस्य भी हैं। प्रस्तुत है इस साप्ताहिक शृंखला की 40वीं कड़ी – सम्पादक

245.
हरिजन आन्दोलन 
(दि बाम्बे सीक्रेट अबस्ट्रक्ट, 25 जनवरी 1941)
95। प्रस्तर 66। तीन छोटी-छोटी सभाएॅं पश्चिम खाण्देश जिले के धूलिया में सम्पन्न हुईं, जिनमें बी.के गायकवाड़, एमएलए और अन्य वक्ताओं ने हरिजन उत्थान पर भाषण दिए। इन सभाओं में हरिजनों के उत्थान में विफल रहने के लिए काॅंग्रेस की आलोचना की गई और उन्हें डा. आंबेडकर का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
हरिजन-उत्थान पर दो छोटी सभाएॅं कैरा और रत्नगिरी में जनपदों में भी हुईं।
246
हरिजन आन्दोलन
(दि बाम्बे सीक्रेट अबस्ट्रक्ट, 1 मार्च 1941)
197। प्रस्तर संख्या 156। श्री बी. के. गायकवाड़ ने 12 फरवरी को नासिक जिले में 150 हरिजनों की सभा को सम्बोधित किया, जिसमें उन्होंने सरकार के प्रति निष्ठा का समर्थन किया, किन्तु हरिजनों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार, विशेष रूप से ‘वतन भूमि’ पर टैक्स लगाए जाने का विरोध किया। उन्होंने डा. आंबेडकर के भवन निर्माण कोष में सहयोग करने की भी अपील की।
247
हरिजन आन्दोलन 
(दि बाम्बे सीक्रेट अबस्ट्रक्ट, 8 मार्च 1941)
222। प्रस्तर संख्या 197। लगभग 3000 लोगों ने महार और मांग वतनदारों के सम्मेलन में भाग लिया, जो डा. आंबेडकर की अध्यक्षता में 23 फरवरी को जिला शोलापुर के तड़वाल में हुआ था। डा. आंबेडकर ने, जो सम्मेलन में मुख्य वक्ता भी थे, हरिजनों के स्तर में सुधार लाने के लिए गाॅंधी जी के प्रयासों को अपर्याप्त बताया। उन्होंने हरिजनों के उत्थान के लिए मैसूर और बड़ौदा राज्यों के प्रशासकों की प्रशंसा की, पर सुझाव दिया कि हैदराबाद राज्य में हरिजनों के लिए सुविधाओं में बढ़ौतरी करना जरूरी है। डा. आंबेडकर ने पार्टी के भवन निर्माण कोष के लिए भी सहयोग करने की अपील की। उन्हें 761 रुपए की थैली भेंट की गई।
248
आंबेडकर का आरोप पत्र
महार सार्वजनिक कार्य में ढुलमुल हैं
पंचायतें बेकार के कामों में धन बहा रही हैं
(दि बाम्बे सीक्रेट अबस्ट्रक्ट, 29 मार्च 1941)
बम्बई, शुक्रवार।

डा. बी. आर. आंबेडकर ने दलित वर्गों की एक जनसभा में,जो कल रात भट्ठ हाई स्कूल के हाल में सम्पन्न हुई थी, प्रमुख पंचायत सदस्यों की उपस्थिति में शहर में संचालित महार समुदाय की पंचायतों की कार्यप्रणाली पर कठोर प्रहार किया। यह सभा थाणा में दलित वर्ग छात्रावास की आर्थिक स्थिति पर विचार करने के लिए की गई थी।

उन्होंने कहा, पंचायतें हर तरह का टैक्स ले रही हैं और समुदाय पर बोझ डाल रही हैं। पहले उस धन को अधिकांश रूप से शराब की हट्टी पर खर्च किया जाता था। किन्तु शहर में शराब-बन्दी हो जाने से वह धन अब ‘बताशा’ खाने और मिठाई बाॅंटने पर खर्च किया जाता है।
डा. आंबेडकर ने समुदाय के बुजुर्गों और वरिष्ठ सदस्यों से पूछा कि आप लोगों को क्या हो गया है कि आप बच्चों की तरह व्यवहार कर रहे हैं और जनता के धन से मिठाईयाॅं खरीदने में लगे हुए हो, जबकि समुदाय को जीवन के संघर्ष में दूसरे समुदायों के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना है?
जब तक हम इन बचकानी हरकतों को नहीं छोड़ेंगे, और सामाजिक तथा शैक्षिक उन्नति के लिए गम्भीरर कार्य नहीं करेंगे, तब तक हमारी आज जैसी बदतर स्थिति को नहीं बदला जा सकता।
दूसरों का उदाहरण
डा. आंबेडकर ने दलित वर्गों के सामने तरक्की करने वाले भारतीय समुदायों का उदाहरण रखा। उन्होंने कहा, इन समुदायों मेंहमेशा उन्हीं पुरुषोंने तरक्की की थी, जिन्होंनेबिना किसी पुरस्कार या प्रशंसा की आशा किए अपने समुदायों में शैक्षिक और अन्य सामाजिक संस्थानों के लिए अपने आप को समर्पित कर दिया था।
हालाॅंकि, दलित वर्गों के शिक्षित युवकों मेंस्थानीय परिषदों, नगरपालिकाओं और इसी तरह के दूसरे स्थानों पर पदों को पाने की प्रवृत्ति देखी जाती है, और यदि वे उनको नहीं मिलते हैं- सबको मिल पाना सम्भव भी नहीं हो सकता- तो वे सामाजिक कार्य में भी रुचि लेना छोड़ देते हैं और समुदाय के भविष्य के प्रति पूरी तरह उदासीन हो जाते हैं।
दूसरे ऐसे लोग भी हैं, जो सामाजिक कार्य में इतने अधीर हैं कि वे कुछ समय तक एक तरह का कार्य करते है, फिर उसे छोड़ कर दूसरे कार्य पर लग जाते हैं, तो उसके बाद उसे भी छोड़कर तीसरा कार्य करने लगते हैं। वे हर काम को छोड़ते चलते हैं और सब जगह गड़बड़ी करते हैं।
249
आंबेडकर जयन्ती के कार्यक्रम
सड़कों पर दो लम्बा जुलूस
(दि बाम्बे क्रानिकल, 15 अप्रैल 1941)
बम्बई, सोमवार।
दलित वर्ग युवाओं की 70 से ज्यादा संस्थाओं ने मिलकर कल डा. बी. आर. आंबेडकर को उनके जन्मदिन पर बधाई दी। वे आज 49 वर्ष के हो जायेंगे।
कल उत्तरी बम्बई में एक लम्बा जुलूस भी देखा गया था, जिसमें डा. आंबेडकर के दस हजार अनुयायियों ने पैदल मार्च किया, और उनके चित्र पर माल्यार्पण किया।
कामगार मैदान में
कामगार मैदान, परेल की सीमित जगह जनमानस से ठसाठस भरा हुआ था। सैकड़ों की संख्या में स्त्रियाॅं और बच्चे भी उस भीड़ में मौजूद थे।
जनसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया, जिसमें डा. आंबेडकर के 49वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए उनके खुशहाल और सफल जीवन की कामनाएॅं की गई थीं।
जनसभा की अध्यक्षता श्री सन्तराम एन. माने ने की थी और सभा को सर्वश्री एस. बी. गायकवाड़, यू. एल. क्रान्दीकर, टी. एन. मकवाना, एस. आर. गायकवाड़ और जी. केल्सीकर वक्ताओं ने सम्बोधित किया था।
डा. आंबेडकर ने सभा के लिए एक सन्देश भेजा था, जिसमें कहा गया है कि उनके लिए अस्पृश्यता-विरोधी आन्दोलन के समर्थन का सबसे अच्छा तरीका यह हो सकता है कि वे बिल्डिंग फण्ड में चन्दा दें। यह अपील उन्होंने दलित वर्गों के सभी स्त्री-पुरुषों से की।
वास्तविक संघर्ष
सभाध्यक्ष श्री माने ने कहा कि डा. आंबेडकर के जन्मदिन का उनके लिए बहुत महत्व है, क्योंकि भारत में सात करोड़ अछूतों की मुक्ति के लिए वास्तविक संघर्ष करने के लिए ही डा. आंबेडकर का जन्म हुआ है। यह सच है कि डा. आंबेडकर से पहले अनेक समाजसुधारकों और मानवतावादियों ने अस्पृश्यता मिटाने का प्रयास किया था, परन्तु उनका तरीका याचना और प्रार्थना करने का था। तुकाराम ने अस्पृश्यता के उन्मूलन की शिक्षा दी थी, और यही शिक्षा बुद्ध ने दी थी, लेकिन उनके अनुयायियों ने उनकी शिक्षा को स्वीकार करने की बजाय, उन्हे सन्त बना दिया और स्वयं अपने पुराने रास्ते पर ही चले। अछूतों को लगातार उनके मानवाधिकारों से वंचित रखा जाता है और उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जाता है।
श्री माने ने कहा कि डा. आंबेडकर की शैक्षिक योग्यताओं और प्रतिभा को देखने के बाद उनके लिए धन एकत्र करना और एक बड़े सरकारी अधिकारी के पद से अवकाश प्राप्त करना बहुत आसान था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि अस्पृश्यता के उन्मूलन का काम सवर्ण हिन्दुओं की दया पर छोड़ दिया जाये, तो वह दिन कभी नहीं आयेगा। इतिहास साक्षी है कि यदि वे चाहते तो दो हजार वर्ष पहले ही इस घृणा को मिटा सकते थे।
केवल एक ही रास्ता 
दलित वर्गों के सामने अब केवल एक ही रास्ता है कि वे संगठित हों और अपनी संयुक्त शक्ति से अपनी माॅंगें मनवाने के लिए उन्हें बाध्य करें। उन्हें अब किसी भी अन्य नेता को स्वीकार न करके केवल डा. आंबेडकर का ही अनुसरण करें। उन्होंने 50 हजार या एक लाख स्वयंसेवकों को तैयार करने का सुझाव दिया और कहा कि यदि आवश्यकता हुई, तो सवर्ण हिन्दुओं के खिलाफ सत्याग्रह किया जायेगा।
दलित वर्ग के बम्बई विश्वविद्यालय में स्नातक श्री एस. बी. गायकवाड़ ने दलित वर्गों में स्वाभिमान पैदा करने और उन्हें एक संगठित तथा गतिशील समुदाय बनाने के लिए डा. आंबेडकर के प्रति अपनी श्रद्धा पेश की।
श्री यू. एल. क्रान्दीकर ने कहा कि डा. आंबेडकर सामाजिक न्याय और स्वतन्त्रता दिलाने के लिए खड़े हुए है। श्री टी. एन. मकवाना ने कहा कि डा. आंबेडकर के जीवन की लड़ाई वंचित और पीड़ित वर्गों के हित के लिए समर्पित है। श्री जी. केलिसकर ने भी श्रद्धा व्यक्त की।
250
डा. आंबेडकर की जयन्ती
(स्टेशन डायरी, पल्टन रोड सब-डिवीजन, ‘ए’ डिवीजन, 15 अप्रैल 1941,)
सब इंस्पेक्टर कादर ने सभा से स्टेशन लौटकर रिपोर्ट की है। डा. आंबेडकर का जन्मदिन मनाने के लिए एक सभा श्री बी. एन. तलपड़े की अध्यक्षता में पिछली रात 11 बजे नवीन गनबो फायर ब्रिगेड स्टेशन के निकट गनबो स्ट्रीट पर हुई, जिसमें बी. बी. मोरे, एम. टी. कदम, गंगाराम साठे और एस. टी. सामन्त ने हरिजनों के लिए डा. आंबेडकर के द्वारा किए गए अच्छे कार्यों के सम्बन्ध में संक्षिप्त भाषण दिए। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि डा. आंबेडकर ही हरिजनों में एक मात्र नेता हैं, जो समुदाय का उत्थान कर सकते हैं और इसलिए हरेक को उनका अनुसरण करना चाहिए। श्री तलपड़े ने समस्त हरिजनों को शिक्षित होकर हरिजनों के उत्थान में कार्य करने की सलाह दी। सभा में 100 लोग थे और वह सुबह 12.20 पर समाप्त हो गई थी।
संख्या 2508/41; ‘ए’ डिवीजन
(ह.)
पुलिस निरीक्षक
पल्टन रोड पुलिस स्टेशन
15 अप्रैल 1941, ‘ए’ डिवीजन, बम्बई
251
डा. आंबेडकर की जयन्ती
(स्टेशन डायरी, पल्टन रोड सब-डिवीजन, ‘बी’ डिवीजन, 14 अप्रैल 1941,)
पी.सी. 1496/बी एवं 1242/बी रिपोर्ट करते हैं कि चन्दनवाड़ी परिसर में आज रात बाबासाहेब आंबेडकर का जन्मदिन मनाया गया, जिसमें सर्वश्री घाटे और पी. टी. बोरले ने भाषण दिए। किसी भी राजनीतिक विषय पर चर्चा नहीं की गई। उन्होंने बाबासाहेब आंबेडकर की प्रशंसा की और समुदाय को उनके दिखाए मार्ग पर चलने की सलाह दी। रिपोट्र करने के लिए कुछ खास नहीं है। समारोह शान्तिपूर्वक 12.15 पर खत्म हुआ।
सत्यापित प्रति
(ह.)
पुलिस निरीक्षक
प्रिन्सेस स्ट्रीट पुलिस स्टेशन
252
डा. आंबेडकर जयन्ती समारोह
(स्टेशन डायरी, किंग्सवे सब-डिवीजन, 13 अप्रैल 1941,)
पी. सी. संख्या 3676/‘ई’ डिवीजन की रिपोर्ट है कि आज 2.55 पर 75 लोगों का एक जुलूस माहिम स्टेशन से तिलक रोड आया और विंसेन्ट रोड होते हुए बी. डी. डी. चाल, नई गाॅंव चला गया, जो शाम 4.15 पर भोईवाड़ा स्टेशन से दादर मेन रोड पर आए एक बड़े जुलूस में शामिल हो गया, और वहाॅं से लाखमसी रोड पर डा. आंबेडकर के बंगले पर गया। बंगले पर डा. आंबेडकर को लोगों ने फूल मालाएॅं पहिनाईं और उसके बाद जुलूस खरेघाट रोड और विंसेन्ट रोड होते हुए वापस 5.15 पर भोईवाड़ा स्टेशन पहुॅंचा। जुलूस में लगभग एक हजार लोग शामिल थे, जिनमें एक डा. माने के पास जुलूस के लिए ‘ई’ डिवीजन के पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी किया गया परमिट था। भोईभाड़ा पुलिस स्टेशन के उपनिरीक्षक कृष्णनन ने उस क्षेत्र में जुलूस की मार्ग रक्षा की। रिपोर्ट करने के लिए कुछ खास नहीं है। बस इतना ही कि जुलूस निकाला गया और डा. आंबेडकर को फूल मालाएॅं पहिनाकर उनका 49वाॅं जन्मदिन मनाया गया।
पुलिस निरीक्षक
किंग्सवे पुलिस स्टेशन
253
डा. बी. आर. आंबेडकर जयन्ती समारोह
(स्टेशन डायरी, भोईभाड़ा सब-डिवीजन, 13 अप्रैल 1941,)
‘ई’ डिवीजन। उप निरीक्षक कृष्णनन ने सूचित किया है कि डा. बाबासाहेब आंबेडकर के जयन्ती के अवसर पर एक छोटा जुलूस डिलिस्ले रोड और माहिम से चलकर दोपहर 2.30 पर कल्याण केन्द्र, नई गाॅंव पहुॅंचा। वहाॅं से एक जुलूस उसके साथ ही दादर रोड, विन्सेन्ट रोड, गोकुलदास पास्ता रोड और दादर मेन रोड से गुजरा, जहाॅं उसे पी. एच. संख्या 138/ई, किंग्सवे के सुपुर्द कर दिया गया। वापसी में जुलूस को विंसेन्ट रोड पर अधिकार में लिया गया, और उसके बाद वह साथ-साथ सुपारीबाग रोड और गोखले सोसाइटी लेनसे होता हुआ शाम 6 बजे कामगार मैदान में समाप्त हुआ। जुलूस में लगभग छह हजार लोग शामिल हुए थे। उसके बाद वहाॅं जनसभा हुई।
अपराह्न 8 बजे
एच. सी. डब्लू. संख्या 1309/ई से सूचना मिली है कि डा.आंबेडकर का 49वाॅं जन्मदिन मनाने के लिए आज सायं 6.30 पर एक सभा इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के तत्वावधान में कामगारा मैदान में हुई। सभा की अध्यक्षता बैरिस्टर एस. एन. माने ने की और सर्वश्री गायकवाड़, मकवाना और लोखण्डे ने सभा को सम्बोधित किया। लगभग 800 लोग सभा में पहुॅंचे थे।
वक्ताओं ने अपने अलग-अलग शब्दों में डा. आंबेडकर के जीवन-इतिहास पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह उन्होंने महानता प्राप्त की। अन्त में श्रोताओं से भवन निर्माण के लिए चन्दा देने का अनुरोध किया गया, जिसका उपयोग पार्टी तथा उसके जुड़े कार्यों के लिए किया जायेंगा।
सभा का समापन शान्तिपूर्वक सायं 7.45 पर हुआ।
(ह.)
पुलिस निरीक्षक
भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन
14 अर्पेल 1941
254
डा. बी. आर. आंबेडकर जयन्ती समारोह
(बम्बई शहर विशेष शाखा, 18 अप्रैल 1941,)
13 और 14 अप्रैल को डा. बी. आर. आंबेडकर के 49वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी और अन्य आबेडकर-समर्थक संगठनों के द्वारा जुलूस और सभाओं का आयोजन किया गया।
13 अप्रैल को एक जुलूस डा. आंबेडकर के चित्र पर मालाएॅं डाले हुए बी. डी. डी. चाल, नई गाॅंव से शुरु हुआ और हिन्दू कालोनी, दादर में डा. आंबेडकर के आवास पर गया, जहाॅं से वह बम्बई के उत्तर में घूमता हुआ कामगार मैदान में समाप्त हुआ। इस जुलूस में लगभग 5000 लोग शामिल थे, जिसमें ‘भजन’ तथा ‘लेजिम’ (एक वाद्य) मण्डली भी थी। इस जुलूस में एक सजा हुआ घोड़ा भी चल रहा था। पूरे रास्ते लोग ‘डा. आंबेडकर की जय’ बोल रहे थे।
कामगार मैदान में बैरिस्टर एस. एन माने की अध्यक्षता में एक जनसभा हुई, जिसमें लगभग एक हजार लोगों ने भाग लिया। डा. आंबेडकर के जीवन और कार्यों पर अध्यक्ष के साथ-साथ एस. बी.गायकवाड़, यू. एल. क्रान्दीकर, टी. एन. मकवाना, एस. आर. गायकवाड़ और जी. केलसीकर के भाषण हुए।
14 अप्रैल को इसी तरह की जनसभाएॅं गुण्बो स्ट्रीट और चन्दनवाड़ी में हुई, जहाॅं हरिजनों के उत्थान के लिए डा. आंबेडकर के कार्यों की प्रशंसा की गई।
नोट-255 से आगे की स्रोत सामग्री शीघ्र ही प्रकाश्य कंवल भारती जी की किताब में मिलेगी। मीडिया विजिल पर यह शृंखला यहीं समाप्त होती है।

 

पिछली कड़ियाँ–

 

39.डॉ. आंबेडकर ने किया मिस्‍टर गांधी का विरोध

38.अस्पृश्यता बौद्धों पर थोपा गया एक दण्ड था-डॉ.आंबेडकर

37.ब्राह्मणों की आबादी तीन फ़ीसदी पर 60 फ़ीसदी उच्च राजपत्रिता पदों पर काबिज़

35. दलितों में मतभेद पर डॉ.आंबेडकर ने जताया दु:ख

34. इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी ने मनाया डॉ.आंबेडकर का 47वाँ जन्मदिन..

33. कचरापट्टी मज़दूरों ने डॉ.आंबेडकर को 1001 रुपये की थैली भेंट की

32.औरंगाबाद अछूत सम्मेलन में पारित हुआ था 14 अप्रैल को ‘अांबेडकर दिवस’ मनाने का प्रस्ताव

31. डॉ.आम्बेडकर ने बंबई में किया स्वामी सहजानंद का सम्मान

30. मैं अखबारों से पूछता हूॅं, तुम्हारे सत्य और सामान्य शिष्टाचार को क्या हो गया -डॉ.आंबेडकर

29. सिद्धांतों पर अडिग रहूँँगा, हम पद नहीं अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं-डॉ.आंबेडकर

28.डॉ.आंबेडकर का ग्रंथ रूढ़िवादी हिंदुओं में सनसनी फैलाएगा- सीआईडी रिपोर्ट

27ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है ब्राह्मणवाद, हालाॅंकि वह इसका जनक है-डॉ.आंबेडकर

26. धर्मांतरण का आंदोलन ख़त्म नहीं होगा- डॉ.आंबेडकर

25. संविधान का पालन न करने पर ही गवर्नर दोषी- डॉ.आंबेडकर

24. ‘500 हरिजनों ने सिख धर्म अपनाया’

23. धर्म बदलने से दलितों को मिली सुविधाएँ ख़त्म नहीं होतीं-डॉ.आंबेडकर

22. डॉ.आंबेडकर ने स्त्रियों से कहा- पहले शर्मनाक पेशा छोड़ो, फिर हमारे साथ आओ !

21. मेरी शिकायत है कि गाँधी तानाशाह क्यों नहीं हैं, भारत को चाहिए कमाल पाशा-डॉ.आंबेडकर

20. डॉ.आंबेडकर ने राजनीति और हिंदू धर्म छोड़ने का मन बनाया !

19. सवर्ण हिंदुओं से चुनाव जीत सकते दलित, तो पूना पैक्ट की ज़रूरत न पड़ती-डॉ.आंबेडकर

18.जोतदार को ज़मीन से बेदख़ल करना अन्याय है- डॉ.आंबेडकर

17. मंदिर प्रवेश छोड़, राजनीति में ऊर्जा लगाएँ दलित -डॉ.आंबेडकर

16अछूतों से घृणा करने वाले सवर्ण नेताओं पर भरोसा न करें- डॉ.आंबेडकर

15न्यायपालिका को ‘ब्राह्मण न्यायपालिक’ कहने पर डॉ.आंबेडकर की निंदा !

14. मन्दिर प्रवेश पर्याप्त नहीं, जाति का उन्मूलन ज़रूरी-डॉ.आंबेडकर

13. गाँधी जी से मिलकर आश्चर्य हुआ कि हममें बहुत ज़्यादा समानता है- डॉ.आंबेडकर

 12.‘पृथक निर्वाचन मंडल’ पर गाँधीजी का अनशन और डॉ.आंबेडकर के तर्क

11. हम अंतरजातीय भोज नहीं, सरकारी नौकरियाँ चाहते हैं-डॉ.आंबेडकर

10.पृथक निर्वाचन मंडल की माँग पर डॉक्टर अांबेडकर का स्वागत और विरोध!

9. डॉ.आंबेडकर ने मुसलमानों से हाथ मिलाया!

8. जब अछूतों ने कहा- हमें आंबेडकर नहीं, गाँधी पर भरोसा!

7. दलित वर्ग का प्रतिनिधि कौन- गाँधी या अांबेडकर?

6. दलित वर्गों के लिए सांविधानिक संरक्षण ज़रूरी-डॉ.अांबेडकर

5. अंधविश्वासों के ख़िलाफ़ प्रभावी क़ानून ज़रूरी- डॉ.आंबेडकर

4. ईश्वर सवर्ण हिन्दुओं को मेरे दुख को समझने की शक्ति और सद्बुद्धि दे !

3 .डॉ.आंबेडकर ने मनुस्मृति जलाई तो भड़का रूढ़िवादी प्रेस !

2. डॉ.आंबेडकर के आंदोलन की कहानी, अख़बारों की ज़़ुबानी

1. डॉ.आंबेडकर के आंदोलन की कहानी, अख़बारों की ज़़ुबानी

 



कँवल भारती : महत्‍वपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक चिंतक, पत्रकारिता से लेखन की शुरुआत। दलित विषयों पर तीखी टिप्‍पणियों के लिए विख्‍यात। कई पुस्‍तकें प्रकाशित। चर्चित स्तंभकार। मीडिया विजिल के सलाहकार मंडल के सदस्य।