Home दस्तावेज़ मोदी जी के “स्वातंत्र्य वीर” सावरकर का माफ़ीनामा पढ़िए

मोदी जी के “स्वातंत्र्य वीर” सावरकर का माफ़ीनामा पढ़िए

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आज यानी 31 दिसंबर 2018 को अख़बारों में एक तस्वीर छपी है जिसमें प्रधानंत्री मोदी सेल्युलर जेल स्थित विनायक दामोदर सावरकर की कोठरी में ध्यानमुद्रा में हैं। इसे देखते हुए मीडिया विजिल में इसी साल 12 मई को छपा सावरकर का माफ़ीनामा  दोबारा  छापा  जा  रहा है ताकि ध्यानमुद्रा देखकर पाठकों का ध्यान न भटके।

कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान मोदी जी ने आरोप लगाया कि कोई कांग्रेस नेता ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ को देखने सेलुलर जेल नहीं गया। दिलचस्प बात है कि विनायक दामोदर सावरकर को 1910 में आजीवन कारावास की सज़ा हुई थी और उस समय नेहरू इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे और गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका में थे। कांग्रेस के सबसे बड़े नेता बाल गंगाधर तिलक थे जिनका निधन 1920 में हुआ जब सावरकर को रिहा करके अंडमान से रत्नागिरि भेजा गया। सवाल है कि माननीय प्रधानमंत्री, सावरकर से न मिलने के लिए किसे निशाना बना रहे थे? वैसे, मोदी जी जिन्हें अपना मेंटर बताते हुए ‘स्वातंत्र्य वीर’ बता रहे हैं, वे स्वतंत्रता आंदोलन से पीठ दिखाकर भाग खड़े हुए थे। जेल जाने से पहले उनका जीवन वाकई एक क्रांतिकारी का था, लेकिन जेल की कठिनाइयों के सामने उनकी वीरता धरी रह गई, जबकि हज़ारों अन्य स्वतंत्रता आंदोलन बहादुरी से हर अत्याचार सह रहे थे।

सावरकर ने अंग्रेज़ों को तमाम माफ़ीनामे लिखे, अपने अपराधों के लिए क्षमा माँगी, वफ़ादारी का भरोसा दिलाया  और कहा कि सरकार उनका ‘जैसा चाहे वैसा उपयोग ‘कर सकती है। वे नौजवानों को विद्रोह के रास्ते से अलग करके अंग्रेज सरकार के पक्ष में लाएँगे। हुआ भी। उन्हें आज़ाद कर दिया गया और वे जीवन भर हिंदुओं और मुसलमानों को में जुटे रहे जैसा कि अंग्रेज चाहते थे। जिन्ना के पहले द्विराष्ट्र सिद्धांत उन्होंने ही दिया था जिसने विभाजन का वैचारिक आधार तैयार किया था।

दूसरी तरफ़ भगत सिंह थे जिन्हें फाँसी दी गई तो उन्होंने अंग्रेजों को लिखित प्रतिवेदन दिया कि उन्हें गोली से उड़ाया जाए क्योंकि वे युद्धबंदी हैं। 

सवाल है कि लड़ाई से पीठ दिखाने वाले को मोदी जी ‘स्वातंत्र्य वीर’ क्यों कह रहे हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि सावरकर नाथूराम गोडसे के गुरु थे और जस्टिस जीवनलाल कपूर कमीशन ने गाँधी जी की हत्या का मुख्य षड़यंत्रकारी सावरकर को ही सिद्द किया था। इसके पहले वायदामाफ़ गवाह की गवाही के बावजूद उसे सिद्ध करने वाले दूसरी गवाही न मिलने की वजह से सावरकर संदेह को  लाभ देकर अदालत ने छोड़ दिया था। बहरहाल, मोदी जी के इतिदास-प्रेम का  इतना फ़ायदा तो हुआ ही है कि लोग मूल पाठ को जानना समझना चाहते हैं। पढ़िए,सावरकर का वह माफ़ीनामा और तय कीजिए कि वे किस कदर ‘वीर’ थे यह 1913 की याचिका है। ऐसी न जाने कितनी याचिकाएँ वे लगातार लिखते रहे-

-संपादक


सेवा में, गृह सदस्य, भारत सरकार

मैं आपके सामने दयापूर्वक विचार के लिए निम्नलिखित बिंदु प्रस्तुत करने की याचना करता हूं:(1) 1911 के जून में जब मैं यहां आया, मुझे अपनी पार्टी के दूसरे दोषियों के साथ चीफ कमिश्नर के ऑफिस ले जाया गया. वहां मुझे ‘डी’ यानी डेंजरस (ख़तरनाक) श्रेणी के क़ैदी के तौर पर वर्गीकृत किया गया; बाक़ी दोषियों को ‘डी’ श्रेणी में नहीं रखा गया. उसके बाद मुझे पूरे छह महीने एकांत कारावास में रखा गया. दूसरे क़ैदियों के साथ ऐसा नहीं किया गया. उस दौरान मुझे नारियल की धुनाई के काम में लगाया गया, जबकि मेरे हाथों से ख़ून बह रहा था. उसके बाद मुझे तेल पेरने की चक्की पर लगाया गया जो कि जेल में कराया जाने वाला सबसे कठिन काम है. हालांकि, इस दौरान मेरा आचरण असाधारण रूप से अच्छा रहा, लेकिन फिर भी छह महीने के बाद मुझे जेल से रिहा नहीं किया गया, जबकि मेरे साथ आये दूसरे दोषियों को रिहा कर दिया गया. उस समय से अब तक मैंने अपना व्यवहार जितना संभव हो सकता है, अच्छा बनाए रखने की कोशिश की है.

(2) जब मैंने तरक्की के लिए याचिका लगाई, तब मुझे कहा गया कि मैं विशेष श्रेणी का क़ैदी हूं और इसलिए मुझे तरक्की नहीं दी जा सकती. जब हम में से किसी ने अच्छे भोजन या विशेष व्यवहार की मांग की, तब हमें कहा गया कि ‘तुम सिर्फ़ साधारण क़ैदी हो, इसलिए तुम्हें वही भोजन खाना होगा, जो दूसरे क़ैदी खाते हैं.’ इस तरह श्रीमान आप देख सकते हैं कि हमें विशेष कष्ट देने के लिए हमें विशेष श्रेणी के क़ैदी की श्रेणी में रखा गया है.

(3) जब मेरे मुक़दमे के अधिकतर लोगों को जेल से रिहा कर दिया गया, तब मैंने भी रिहाई की दरख़्वास्त की. हालांकि, मुझ पर अधिक से अधिक तो या तीन बार मुक़दमा चला है, फिर भी मुझे रिहा नहीं किया गया, जबकि जिन्हें रिहा किया गया, उन पर तो दर्जन से भी ज़्यादा बार मुक़दमा चला है. मुझे उनके साथ इसलिए नहीं रिहा गया क्योंकि मेरा मुक़दमा उनके साथ चल रहा था. लेकिन जब आख़िरकार मेरी रिहाई का आदेश आया, तब संयोग से कुछ राजनीतिक क़ैदियों को जेल में लाया गया, और मुझे उनके साथ बंद कर दिया गया, क्योंकि मेरा मुक़दमा उनके साथ चल रहा था.

(4) अगर मैं भारतीय जेल में रहता, तो इस समय तक मुझे काफ़ी राहत मिल गई होती. मैं अपने घर ज़्यादा पत्र भेज पाता; लोग मुझसे मिलने आते. अगर मैं साधारण और सरल क़ैदी होता, तो इस समय तक मैं इस जेल से रिहा कर दिया गया होता और मैं टिकट-लीव की उम्मीद कर रहा होता. लेकिन, वर्तमान समय में मुझे न तो भारतीय जेलों की कोई सुविधा मिल रही है, न ही इस बंदी बस्ती के नियम मुझ पर पर लागू हो रहे हैं. जबकि मुझे दोनों की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है.

(5) इसलिए हुजूर, क्या मुझे भारतीय जेल में भेजकर या मुझे दूसरे क़ैदियों की तरह साधारण क़ैदी घोषित करके, इस विषम परिस्थिति से बाहर निकालने की कृपा करेंगे? मैं किसी तरजीही व्यवहार की मांग नहीं कर रहा हूं, जबकि मैं मानता हूं कि एक राजनीतिक बंदी होने के नाते मैं किसी भी स्वतंत्र देश के सभ्य प्रशासन से ऐसी आशा रख सकता था. मैं तो बस ऐसी रियायतों और इनायतों की मांग कर रहा हूं, जिसके हक़दार सबसे वंचित दोषी और आदतन अपराधी भी माने जाते हैं. मुझे स्थायी तौर पर जेल में बंद रखने की वर्तमान योजना को देखते हुए मैं जीवन और आशा बचाए रखने को लेकर पूरी तरह से नाउम्मीद होता जा रहा हूं. मियादी क़ैदियों की स्थिति अलग है. लेकिन श्रीमान मेरी आंखों के सामने 50 वर्ष नाच रहे हैं. मैं इतने लंबे समय को बंद कारावास में गुजारने के लिए नैतिक ऊर्जा कहां से जमा करूं, जबकि मैं उन रियायतों से भी वंचित हूं, जिसकी उम्मीद सबसे हिंसक क़ैदी भी अपने जीवन को सुगम बनाने के लिए कर सकता है? या तो मुझे भारतीय जेल में भेज दिया जाए, क्योंकि मैं वहां

(ए) सज़ा में छूट हासिल कर सकता हूं;

(बी) वहां मैं हर चार महीने पर अपने लोगों से मिल सकूंगा. जो लोग दुर्भाग्य से जेल में हैं, वे ही यह जानते हैं कि अपने सगे-संबंधियों और नज़दीकी लोगों से जब-तब मिलना कितना बड़ा सुख है!

(सी) सबसे बढ़कर मेरे पास भले क़ानूनी नहीं, मगर 14 वर्षों के बाद रिहाई का नैतिक अधिकार तो होगा.

या अगर मुझे भारत नहीं भेजा सकता है, तो कम से कम मुझे किसी अन्य क़ैदी की तरह जेल के बाहर आशा के साथ निकलने की इजाज़त दी जाए, 5 वर्ष के बाद मुलाक़ातों की इजाज़त दी जाए, मुझे टिकट लीव दी जाए, ताकि मैं अपने परिवार को यहां बुला सकूं. अगर मुझे ये रियायतें दी जाती हैं, तब मुझे सिर्फ़ एक बात की शिकायत रहेगी कि मुझे सिर्फ़ मेरी ग़लती का दोषी मान जाए, न कि दूसरों की ग़लती का. यह एक दयनीय स्थिति है कि मुझे इन सारी चीज़ों के लिए याचना करनी पड़ रही है, जो सभी इनसान का मौलिक अधिकार है! ऐसे समय में जब एक तरफ यहां क़रीब 20 राजनीतिक बंदी हैं, जो जवान, सक्रिय और बेचैन हैं, तो दूसरी तरफ बंदी बस्ती के नियम-क़ानून हैं, जो विचार और अभिव्यक्ति की आज़ादी को न्यूनतम संभव स्तर तक महदूर करने वाले हैं; यह अवश्यंवभावी है कि इनमें से कोई, जब-तब किसी न किसी क़ानून को तोड़ता हुआ पाया जाए. अगर ऐसे सारे कृत्यों के लिए सारे दोषियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाए, तो बाहर निकलने की कोई भी उम्मीद मुझे नज़र नहीं आती.

अंत में, हुजूर, मैं आपको फिर से याद दिलाना चाहता हूं कि आप दयालुता दिखाते हुए सज़ा माफ़ी की मेरी 1911 में भेजी गयी याचिका पर पुनर्विचार करें और इसे भारत सरकार को फॉरवर्ड करने की अनुशंसा करें.

भारतीय राजनीति के ताज़ा घटनाक्रमों और सबको साथ लेकर चलने की सरकार की नीतियों ने संविधानवादी रास्ते को एक बार फिर खोल दिया है. अब भारत और मानवता की भलाई चाहने वाला कोई भी व्यक्ति, अंधा होकर उन कांटों से भरी राहों पर नहीं चलेगा, जैसा कि 1906-07 की नाउम्मीदी और उत्तेजना से भरे वातावरण ने हमें शांति और तरक्की के रास्ते से भटका दिया था.

इसलिए अगर सरकार अपनी असीम भलमनसाहत और दयालुता में मुझे रिहा करती है, मैं आपको यक़ीन दिलाता हूं कि मैं संविधानवादी विकास का सबसे कट्टर समर्थक रहूंगा और अंग्रेज़ी सरकार के प्रति वफ़ादार रहूंगा, जो कि विकास की सबसे पहली शर्त है.

जब तक हम जेल में हैं, तब तक महामहिम के सैकड़ों-हजारें वफ़ादार प्रजा के घरों में असली हर्ष और सुख नहीं आ सकता, क्योंकि ख़ून के रिश्ते से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता. अगर हमें रिहा कर दिया जाता है, तो लोग ख़ुशी और कृतज्ञता के साथ सरकार के पक्ष में, जो सज़ा देने और बदला लेने से ज़्यादा माफ़ करना और सुधारना जानती है, नारे लगाएंगे.

इससे भी बढ़कर संविधानवादी रास्ते में मेरा धर्म-परिवर्तन भारत और भारत से बाहर रह रहे उन सभी भटके हुए नौजवानों को सही रास्ते पर लाएगा, जो कभी मुझे अपने पथ-प्रदर्शक के तौर पर देखते थे. मैं भारत सरकार जैसा चाहे, उस रूप में सेवा करने के लिए तैयार हूं, क्योंकि जैसे मेरा यह रूपांतरण अंतरात्मा की पुकार है, उसी तरह से मेरा भविष्य का व्यवहार भी होगा. मुझे जेल में रखने से आपको होने वाला फ़ायदा मुझे जेल से रिहा करने से होने वाले होने वाले फ़ायदे की तुलना में कुछ भी नहीं है.

जो ताक़तवर है, वही दयालु हो सकता है और एक होनहार पुत्र सरकार के दरवाज़े के अलावा और कहां लौट सकता है. आशा है, हुजूर मेरी याचनाओं पर दयालुता से विचार करेंगे.

वी.डी. सावरकर

(स्रोत — आर.सी मजूमदार, पीनल सेटलमेंट्स इन द अंडमान्स, प्रकाशन विभाग, 1975)

 

 

 



 

26 COMMENTS

  1. श्रीमान जी, नमस्कार ! जरा सावरकरजी पर हुए अत्याचारों के बारे में भी पढ़ लीजिए . सावरकर एक नाजुक शरीर पृकृति के इंसान थे. उन्हें बतौर सजा भारी जंजीरों से बांध कर कोल्हू चलाने की सजा दी जो अन्य किसी स्वतंत्रता सेनानी के हिस्से नही आई. और सावरकर जी ने ये किया, लंबे समय तक किया लेकिन याद रहे, वे भी इंसान थे उनका शरीर साथ नही दे पाया. और ऐसे अवस्था मे मानसिक रूप से टूट जाना स्वाभाविक ही है . आखिर वे इंसान थे जो इस कदर के शारिरिक अत्याचारों को सहन नही कर पाए . (वे कोई कट्टर जेहादी य्या धार्मिक आतंकवादी नही थे जैसे अमेरिका की जेलों में बंद है , जो थर्ड डिग्री के बाद भी धार्मिकता के चलते मुह नही खोलते .) और सावरकर ने ये कोल्हू क्यो ढोया, क्यो आजीवन कालापानी की सजा काटी ? क्यों ? क्यो ? क्यों , पद के लिए, पैशे के लिए? क्या जवाब है?वे चाहते तो वे भी अंग्रेजों की तरफदारी कर फायदा उठा सकते थे, उस जमाने मे कई नेताओं ने किया, अंग्रेजो के खर्चे से दुनिया घूमे, गांधी के खिलाफ अंग्रेजो का दिलों जान से साथ दिया, सावरकर ने ये सब किया क्या ? और हा, नेहरू ने अगर अहमदनगर जेल में भारत का इतिहास लिखा है तो सोचो, उनको किस कदर शांति और सुविधाएं मिली होंगीं ? सावरकर को थी क्या ये सब सुविधाएं? सावरकर का गर मूल्यांकन करना हो तो उनके सम्पूर्ण कार्यो का मूल्यांकन कीजिये ये नही की एखादी घटना को पकड़ कर उछलना शुरू कर दे. मोहम्मद साहब भी कितनी लड़ाइयों में हारे थे उन्हें समझौते करने पड़े थे, लेकिन सिर्फ इन बातो से आप उनका आंकलन करते है क्या ? नही न ! बस इसी समझदारी की उम्मीद सावरकर के मामले में भी है .अन्यथा न ले.

    • KOLHOO DHOYA KAHAN ? PEHLE HI PASAR GAYA. KALAPAANI KI SAZA KAATI KAHAAN ? PEHLE HI BHAAG KHADA HUA.
      JAB HIMMAT NAHIN THI TO KYA ZAROORAT THI APNE BAAP BRITISHERS SE PANGA MOL LENE KI ?
      “JAISE CHAAHEIN WAISE UPYOG KAREIN” … SAVARKAR BRAND CONDOMS !!!

    • BHAINCHOD BHOSDIKE BHAGVA-BHADVE M.C ! YAHAAN TOO USS SWADESHI BHAGVA CONDOM SAVARKAR KI TULNA MUHAMMAD (S.A.W.) SE KAR RAHA HAI ?
      MUHAMMAD (S.A.W.) NE TO APNI ZINDAGI MEIN ISLAM KO POORI DUNIYA MEIN FAILA DIYA … SAVARKAR AUR USKE SAATHI BHAGVA-BHADVON SE 100 SAAL MEIN BHI USKA 1% BHI NAHIN HO SAKA.
      WAISE BHI KALAPAANI SE CHHOOTKAR BHI SAVARKAR KAUN SA SUDHAR GAYA THA ? BLOODY BRIBER OF BRITISHERS !

      • भगवा को अपशब्द बोलने से पहले खुद शर्म करो जो 9 साल की बेटी के साथ सोता है उसके नाम की माला पांच टाइम जपते हो , जोल्हा जोल्हे रहेगा

        • bhai anonymous to fir moka mile to pta karna ki manu kiski olad tha or saraswati beti hote huye bhi apke bramha g unke sath kyu soye the or unka nam bhi karodo log lete hai

          • Post kon si he or aap bolte kis subject per ho isliye Jo meter pe baat chal rahi he uspe baat kariye kyuki kon kiske sath soya o aap dekhne gye the Kya ? Baki books me likha hua sab sahi ho ya uske some kan reason malum hona jaruri he

    • तो ये दारुण दुःख तो किसी सरकार की खिलाफत करने पर मिलने ही वाला था। ब्रिटिश तो यही चाहते थे कि कोई भी जो टूट सकता है उसे किसी भी तरह से तोड़ दो ताकि या तो वो अंग्रेज़ो में मिल जाये और या खत्म हो जाये।

    • अरे ये देसभक्त है, भगत सिंह और उनके साथियों ने कभी ऐसा नहीं गिड़गिड़ाए,और अपने अधिकार के लिए जेल के अंदर ही भूख हड़ताल की,जिसमे जतिन दास की मृत्यु भी हुई,क्या इन लोगो के परिवार नहीं था,सब इसी की तरह कायर होते तो आज भी देश गुलाम होता,और सावरकर ने अंग्रेजो का काम ईमानदारी से किया और हिन्दू ,मुस्लिम को बाटा जो अंग्रेज चाहते है, और गांधी जी जो अंग्रेजो को झुकाने वाले व्यक्ति थे उनको इसने धर्म के नाम पर मरवाया और अंग्रेजो की हार का बदला लिया,मैं पूंछता हूँ ये फर्जी हिन्दू भक्त ने जिन्ना को क्यों नहीं मारा उसने गांधी जी को क्यों मारा, अपने आकाओ का वफादार बनने के लिए।।

    • इसका मतलब गद्दारी की है। तो वह गद्दार ही कहा जाएगा।

    • तो ये नीच तेर के कैसे भाग जब ये जंज़ीरों में था ???
      ये गोरो का पिल्ला था समझा !!

  2. Do you remember 28may 2017 MAN KI BAAT. MODI PAID RICH TRIBUTE TO SAWARKAR ON HIS BIRTHDAY. BUT,do you know on this day a great Revolutionary died in a bomb blast just to test a BOMB TO release IMPRISONED Bhagat Singh.His hands blown away. Intestine came out. He was a fine brain of HSRA and husband of Durga Bhabhi. Had he not given rs 500 to Bhabhi Bhagat Singh could not have escaped Lahore. AND on his death AZAD wept . Azad lost much hope ABOUT future of HSRA. As if his right hand gone. MODI never paid any tribute to the GREAT GUJRATI SON SHAHID BHAGVATI CHARAN VOHRA. WHO ARE YOUR HISTORY EXPERT IN ghost writing team Mr Modi. Pl Google. the

  3. Murkho jhooth failana band karo veer savarkar ji HINDUSTAN ka gaurav hai jo maafiname tum show kar rahe ho woh sab unke jail se nikalne ke tactics the taaki rashtra ki sewa ki ja sake thoda padho pehle unki history ke baare mei tab pata chalega bahar aakar bhi unhone apni koshish jaari rakhi rashtra ko bachane ki aaj jo punjab aur bangladesh bacha hua hai woh unhi ki den hai nahin toh poora pakistaan mei chale jata .ek muslim arshad hussain yahaan jyada chila chot kar raha hai toh usse yahi kahunga ki bhai waise toh hum samaan se hi baat karte hai par tu jis tareeke se baat kar raha hai tujhe bata dun madarchod tere baap hai hum jo prophet mohammad ki baat tu kar raha hai ki unhone saari zindagi islam ko failaya hai ye wahi hai na jinhone 6 saal ki aisha ka rape kiya tha sab jante hai ki bhagwa aatankwaad jaisa koi shabd nahi aur duniya mei aatankwaad ka kya dharm hai woh bhi aab jante hai hara samjha ab sun tameej se rakhoge toh hum bhi tameej se baat karenge nahi toh pakka tumhara ilaaj kar denge. हर हर महादेव

  4. Ham SAB dunia ke GARIB, mazdoor kisan Aurat bachhe ek hai. Hamari ladai POOJIVADI vyavastha he shosak Tata Birla ,O Suzuki ( nirdosh MARUTI MANESAR ke MAZDOORO KO jail bhijwane gala Imperialist) se HAI. UNKE nokar Sonia, Nehru ,bajpai ( 1700 page ke khooni dusre shram sudhar
    Ayog 2000 me )hai. Sasak vargo ki mahila purush, Hindu Muslim se hai chahe mukhtar Abbas naqwi ho Salman khurshid ho you Farsi COMMUNIST YECHURI ho. Chahe Saharanpur par kuch na bolne Vali MAYAVATI MULAYAM ho.Dunia ke MAZDOORO ek ho. Aisi high court Ka mazdoor KYA KARE jiska judge (Chandigarh high court judge) Japanese o Suzuki Ka dalal ho . Aur kahe Maruti Suzuki workers KO Bail Di to videshi poonji nivesh prabhavit hoga. Dekha Maruti Suzukiworkersunion.blogspot.com . ya pudr.org ki 2001,2006,2013 ki reports. Ya DOCUMENTARY THE FACTORY BY RAHUL ROY. YA GURGAON MANESAR PLANT KE MAZDOORO SE KAHO KYO PAKISTAN, KARACHI KE MAZDOORO NE UNKA SAMARTHAN KIYA. NA CONGRESS NA BJP NA BHARTIYA MAZDOOR SANGH ( SABSE BADI CENTRAL TRADE UNION) NE KIYA. Isme Hindu Muslim scholars ek hokar lade. AAP ME KITNE LOG JANTE HAI 18 JULY 2012 MARUTI, MANESAR KE BARE ME?

  5. Jailo me Jatin das Bhagat Singh hi Nahi sekdo SHAHID o KO kroorta SE mara Gaya. British Armoury lootne vale master Suryasrn ho ya Harding par BOMB fekna ho ANGREZ KYA Kisi Kasai SE Kam the

  6. BJP RSS ke kutte na jane kyun kayar admi ko Veer kahte hain. Unke Sardar Patel Pasand hain, jo ki inke baap jansagh ko jante the unhone ne gandhi ji ko katl kiya. RSS ke kutte godse ko accha mante hain aur hamesha se aise hee rahe, aaj bhi. Inke role model he kayar hain.

  7. श्रीमान जी, नमस्कार ! जरा सावरकरजी पर हुए अत्याचारों के बारे में भी पढ़ लीजिए .
    सावरकर का अगर मूल्यांकन करना हो तो उनके सम्पूर्ण कार्यो का मूल्यांकन कीजिये

  8. गांधी नेहरू खुब अंग्रेजों चाटुकारिता की – आप वो कर रहे है जो अंग्रेज गाँधी नेहरू चाहते थे

    नाम ही काफी है वीर सावरकर जी

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