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गैलीलियो को माफ़ीनामा पढ़ें और सोचें कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर क्यों है !

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एक विज्ञापन में अमिताभ बच्चन कच्छ के रण में गधों को देखने के लिए जो दूरबीन लटकाने की बात करते हैं, उसका आविष्कार इटली के वैज्ञानिक गैलिलियो ने किया था। गैलीलियो अपने युग के महान वैज्ञानिक थे। उन्होंने कोपरनिकस के इस सिद्धांत का समर्थन किया था कि पृथ्वी स्थिर नहीं, बल्कि सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है। यह ईसाई धर्मग्रंथों में वर्णित क़िस्सों से उलट बात थी। नतीजे में गैलीलियो को चर्चा का कोपभाजन होना पड़ा। चर्च ने 1992 में स्वीकर किया कि करीब 300 साल पहले गैलीलियो को सज़ा सुनाने से संबंधित 1633 का उसका आदेश ग़लत था। उस समय चर्च इतना ताक़तवर था कि गैलीलियो को माफ़ी माँगने के लिए मजबूर होना पड़ा था। पेश है, उस माफ़ीनामे का अनुवाद ताकि हम समझ पाएँ कि धर्म या संस्कृति के नाम पर ज्ञान-विज्ञान की राह रोकना मानवता के लिए कितना नुकसानदेह हो सकता है। इस माफ़ीनामे का अनुवाद फ़ेसबुक पर चर्चित आचार्य रामपलट दास ने किया है।

गैलीलियो का माफ़ीनामा

 


” मैं, गैलीलियो गैलीली वल्द मरहूम विन्सेंजियो गैलीली, फ्लोरेन्स वाले, उम्र- ७० साल , जिसे न्यायालय द्वारा अपधर्म के लिए व्यक्तिगत रूप से अभियोजित किया गया है, समस्त ईसाई गणराज्य में अपधर्म के विरुद्ध इस सबसे बड़े न्यायालय के अति सम्मानित महानुभाव लॉर्ड कार्डिनल्स तथा इनक्विज़िटर जनरल्स के समक्ष घुटनों के बल बैठकर परम पवित्र गॉस्पेल पर हाथ रखकर कसम खाता हूँ कि मैं कैथलिक चर्च की धारणाओं, शिक्षाओं तथा उपदेशों में आस्था रखता था, आस्था रखता हूँ तथा ईश्वर की अनुकम्पा से भविष्य में भी आस्था रखूंगा .

परन्तु , चूँकि सूर्य के स्थिर होने, उसके ब्रह्माण्ड के केन्द्र में होने , पृथ्वी के भ्रमणशील होने तथा ब्रह्माण्ड के केन्द्र में न होने सम्बन्धी भ्रामक सिद्धान्त का किसी भी रूप में बचाव, प्रचार या समर्थन करने की इस न्यायालय द्वारा स्पष्ट मनाही का लिखित नोटिस पाने के बावज़ूद मैंने एक ऐसी किताब लिखकर प्रकाशित करायी है, जिसमें मैंने इस निन्दित सिद्धान्त की चर्चा की है तथा इसके पक्ष में, बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे, तर्क प्रस्तुत किए हैं, इसलिए मुझे सूर्य को स्थिर , पृथ्वी को भ्रमणशील तथा पृथ्वी की बजाए सूर्य के ब्रह्माण्ड के केन्द्र में होने के सिद्धान्त को अवधारित करने और उसमें विश्वास करने के लिए अपधर्म का आरोपी पाया गया है .

आप महानुभावों तथा समस्त आस्थावान ईसाई समुदाय के मन से इस सन्देह को दूर करने के लिए मैं सच्चे मन से अपनी सम्पूर्ण आस्था के साथ क्षमा मांगता हूँ ; मैं इन भ्रामक गलतियों तथा धर्म-विरुद्ध बातों की निन्दा करता हूँ . इसके साथ ही, पवित्र कैथोलिक चर्च के सिद्धान्तों के विपरीत जो भी विचार तथा सम्प्रदाय हैं , उनकी भी निन्दा करता हूँ ; और मैं शपथ लेता हूँ कि भविष्य में इस प्रकार की कोई बात न तो कहूँगा और न ही अपने भाषण और लेखन में लाऊंगा, जिसके कारण मुझपर अपधर्म का पुनः सन्देह उत्पन्न हो ; और मुझे यदि किसी ऐसे अपधर्मी का पता चलता है तो तत्काल उसका परित्याग करूँगा , इस पवित्र न्यायालय के संज्ञान में लाऊंगा और उसकी सार्वजनिक निन्दा करूँगा .
मैं शपथपूर्वक यह भी वचन देता हूँ कि इस पवित्र न्यायालय द्वारा लगाए गए या लगाए जाने वाले प्रायश्चित-दण्ड का पालन करूँगा . और यदि मैं इन वचनों तथा शपथ में से किसी का भी उल्लंघन करूँ तो ऐसे मामलों में दिए जाने वाले प्रत्येक दण्ड को भुगतने के लिए प्रस्तुत रहूँगा .
ईश्वर तथा पवित्र गॉस्पेल मेरी मदद करें .

मैं पूर्वोक्त गैलीलियो गैलीली स्वयं को उपर्युक्तानुसार शपथबद्ध, परित्यक्त, वचनबद्ध तथा आबन्धित करता हूँ; और सत्य के प्रमाण के रूप में मैंने अपने इस माफ़ीनामे को अपनी हस्तलिपि में लिखा है तथा शब्दशः बोलकर पढ़ा है.

कान्वेंट डेला मिनर्वा, रोम में आज दिनांक 22 जून 1633 को मुझ गैलीलियो गैलीली ने अपनी हस्तलिपि में इस माफ़ीनामे को लिखा है ।”

कहते हैं, इस माफीनामे को लिखने-पढ़ने के बाद उठकर खड़े होते हुए गैलीलियो ने बुदबुदाते हुए कहा था – इसके बावज़ूद वह घूमती है ।

स्रोत :- On The Shoulders of Giants