Home काॅलम मैक्सिको सीमा पर भारतीय घुसपैठियों को मोदी की ‘बदनाम छवि’ का सहारा!

मैक्सिको सीमा पर भारतीय घुसपैठियों को मोदी की ‘बदनाम छवि’ का सहारा!

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विकास नारायण राय

 

दरअसल, मुन्नी बदनाम हुयी….. बॉलीवुड के इस लोकप्रिय फिल्मी गीत की तर्ज पर मैक्सिको सीमा से अमेरिका में अवैध रूप से दाखिल होते भारतीय भी चाहें तो आज गा सकते हैं- मोदी बदनाम हुआ…..

आखिर मोदी सरकार की अल्पसंख्यकों के प्रति व्यवहार को लेकर बदनामी इन अवैध अप्रवासियों के बड़े काम जो आ रही है| मुख्यतः पंजाब से निकलने वाले सिख, भारत में धार्मिक और राजनीतिक उत्पीड़न का हवाला देकर अमेरिका में प्रायः इस आधार पर शरण मांगते मिलेंगे। लॉस एन्जेल्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार उनका मुख्य तर्क होता है कि शासक भारतीय जनता पार्टी उन्हें औरों के प्रति हिंसा करने और ड्रग पहुँचाने के लिये मजबूर करती है|

असम के पापुलेशन रजिस्टर में ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ को चिह्नित करना मोदी समर्थकों को चुनाव जीतने के लिए एक भावनात्मक मुद्दा नजर आता है| कुछ वैसा ही हाल ट्रम्प समर्थकों का भी मैक्सिको सीमा से अमेरिका में घुसने वाले अवैध अप्रवासियों को लेकर रहा है| दुनिया भर में बढ़ते प्रवासी संकट ने इसे और उत्प्रेरित किया है|

प्रधानमन्त्री मोदी ने इस बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधन में बेशक देश में तांडव करती हिन्दुत्ववादी कट्टरता और बढ़ती मॉब लिंचिंग का जिक्र न किया हो लेकिन अमेरिका में भारत की यही छवि मैक्सिको रूट से जाने वाले हमारे अवैध घुसपैठियों के काम आ रही है|लॉस एन्जेल्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण कैलिफ़ोर्निया के विक्टोर्विले फ़ेडरल प्रिजन में निरीक्षण के लिए गये डेमोक्रेट कांग्रेसमैन मार्कटकानोभी दंग रह गए जब उन्हें वहां बंद सैकड़ों अवैध अप्रवासियों में चालीस प्रतिशत भारत से आये हुए लोग मिले|

जाहिर है, भारतीय शरणार्थी बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में मैक्सिको रूट का यह बड़ा जोखिम ले रहे हैं|भारत से दुबई,इटली,जर्मनी, मैक्सिको, और वहाँ कुछ दिन रुक कर मौका पाते ही मैक्सिको सीमा पर दीवार पार कर अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल की गिरफ्त में| यह सब बावजूद इसके कि मैक्सिको रूट को बंद करना राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपना व्यक्तिगत एजेंडा बना रखा है|  हालाँकि, यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के मुताबिक पकड़े जाने पर भारतीय शरणार्थी धार्मिक और राजनीतिक उत्पीड़न के निशाने पर होने का दावा करते हैं|

और आप क्या सोचते थे कि मैक्सिको के रास्ते सिर्फ लैटिन भाषी लोग ही अमेरिका में घुसते हैं| कैलिफ़ोर्निया की सायराक्यूज यूनिवर्सिटी के ट्रांसैक्शनल रिकार्ड्स एक्सेस क्लीरिंग हाउस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 में अभी तक कुल  4,197 भारतीय नागरिक मैक्सिको सीमा से अमेरिका में अवैध रूप से घुसते पकड़े गए हैं|

दरअसल, मोदी राज में इनकी संख्या उत्तरोत्तर बढ़ती गयी है| जहाँ 2015 में मैक्सिको सीमा पर किसी माह में अधिकतम दो सौ भारतीय शरणार्थी पकड़े गए, 2016 और 2017 में यह संख्या चार सौ और 2018 में आठ सौ हो गयी| भारत में रोजगार के मोर्चे पर ‘अच्छे दिन’ के लक्षण तो नहीं ही हैं ये|

यह तो साफ़ है कि प्रधानमन्त्री मोदी के लाख ‘अच्छे दिन आयेंगे’ दोहराने के बावजूद भारत से अवैध बाहर जाने वालों की कतार लम्बी ही होती गयी है। ये सभी वित्त मंत्री अरुण जेतली के दोस्त विजय माल्या जैसी किस्मत वाले तो नहीं हो सकते कि भारतीय जेलों में हवा-रोशनी की कमी का हवाला देकर विदेशों में रहने का हक मांगें| हाँ, सभी मोदी के मेहुल भाई की तर्ज पर भारत में मॉब लिंचिंग के खतरे का हवाला जरूर दे रहे हैं।

हालाँकि, अमेरिकी बंदी गृहों में महीनों प्रतीक्षारत इन शरणार्थियों की तंगहाली भी कम नहीं| यहाँ तक कि सिखों को धार्मिक प्रतीक चिन्ह,पगड़ी और कड़ा भी उतारना पड़ता है|क्लीरिंगहाउस के अनुसार, 2012 से 2017 के बीच 42 प्रतिशत भारतीय शरणार्थियों की अमेरिका में शरण की प्रार्थना ठुकरा दी गयी|

लॉस एन्जेल्स टाइम्स की रिपोर्टर सारा पर्विनी ने पंजाब के बीस वर्षीय सुखविंदर की मार्मिक कहानी बयान की है| उसे गत वर्ष एक कार में आये भाजपा के युवाओं ने हॉकियों से बुरी तरह पीटा क्योंकि उसने मत भिन्नता के चलते उनकी पार्टी में शामिल होने से मना कर दिया। परिवार ने सोना और अनाज बेचकर उसके देश से बाहर जाने का प्रबंध किया|

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया के ग्लोबल पालिसी स्कूल के असिस्टेंट प्रोफेसर गौरव खन्ना का मानना है कि भारत में भाजपा का शासन आने के बाद धार्मिक और राजनीतिक उत्पीड़न में वृद्धि हुयी है| इसी यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विनय लाल के मुताबिक उन्होंने लोगों को राजनीतिक उत्पीड़न से बचने के लिए भारत से अमेरिका आने के सबूत नहीं देखे हैं, लेकिन यह संभव है|

इस पृष्ठभूमि में यदि भारतीय घुसपैठिये भी विदेशों में शरण हथियाने के लिए मोदी शासन की बदनाम फासीवादी छवि का बहाना ले रहे हों तो आश्चर्य क्या! क्या इसे भी मोदी के औसतन प्रति माह दो देशों की यात्रा करने का ही हासिल कहा जायेगा?

 

(अवकाश प्राप्त आईपीएस विकास नारायण राय, हरियाणा के डीजीपी और नेशनल पुलिस अकादमी, हैदराबाद के निदेशक रह चुके हैं।)