Home काॅलम प्रपंचतंत्रः किम्भो…किम्भो! फरेब का उत्तोलक

प्रपंचतंत्रः किम्भो…किम्भो! फरेब का उत्तोलक

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अनिल यादव

बाबा रामदेव का स्वदेशी के दावे वाला किम्भो भी फर्जी निकला.

हरिद्वार के किसानों की जमींन हड़पने, टैक्स चोरी की तिकड़में करने, चीन को चोरी से चंदन भेजने, जनता को पैंतीस रूपए लीटर का पेट्रोल दिलाने, चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार को पैसे बांटने की गोपनीयता सिखाने, मोदी को राजर्षि की उपाधि देने, सलवार पहन कर दिल्ली से भागने और नागपुरिया राष्ट्रवाद की नौटंकी में अरबपति सन्यासी का रोल करने समेत बाबा की न जाने कितनी छवियां जगर-मगर कर रही हैं. टीवी पर बाबा के विज्ञापनों की धकमपेल बारंबारता के कारण एक पुरानी याद उभर आई है.

2006 का साल रहा होगा. सुबह पार्कों में जनता कपालभाती की धौंकनी चलाने लगी थी और ट्रैफिक जाम में फंसे लोग नाखून रगड़ते दिखने लगे थे. सीपीएम की वृंदा करात ने पतंजलि की दवाइयों में जानवरों की हड्डियां और आदमी की खोपड़ी का चूरन मिलाने का आरोप लगाया था. मैंने अपने एक कॉलम में बाबा द्वारा योग की चेतना जगाने, जनता को मुनाफाखोर दवा कंपनियों-डाक्टरों के चंगुल से छुड़ाने और सन्यास को समाजसेवा का पुल बनाने से विह्वल होकर कलम तोड़ दी थी. तब बाबा पेप्सी-कोक से टायलेट साफ करने का आह्वान करते थे और प्राणायाम सिखाने के लिए कैंप लगाया करते थे.

बाबा एक दिन लखनऊ आए. मुझे मिलने के लिए बुलाया.

बाबा सहारा चिटफंड कंपनी के सबसे बड़े मैनेजर की कोठी ‘व्हाइट हाउस’ में ठहरे थे. मैनेजर की बीवी, बाबा की धर्मबहन बनकर लगभग योगिनी हो चुकी थीं. बाबा ने धन्यवाद के रूप में कहा, मैं तेरा कॉलम फोटोकापी कराके अपने कैंपों में बंटवा रहा हूं. तू मुझसे प्राणायाम सीख ले. मैं सहारा शहर में लगे इलीट कैंप में सुबह पांच बजे पहुंच कर मुफ्त में प्राणायाम सीखने लगा. इस कैंप में आते और जाते समय तमाम मेडिकल टेस्ट किए जाते थे और फायदा लगे हाथ अगले दिन बता दिया जाता था.

एक दिन बाबा ने मुझे फिर कोठी पर बुलाया, जहां पतंजलि के उत्पादों की फ्रैंचाइजी लेने वाले व्यापार महत्वाकांक्षियों की भीड़ लगी थी. मुझे अंदर बाबा के कमरे में ले जाया गया. हालचाल के बाद बाबा ने बहुत स्नेह से कहा, जो तू है वही मैं हूं! मैं सोच रहा था कि बाबा आध्यात्मिक तरंग में कह रहे हैं कि उसी एक परमात्मा का अंश हम दोनों के भीतर है. मैने कहा, सही बात है. वही एक तो हर जगह है. बाबा ने थोड़ा जोर देकर कहा, तू समझ नहीं रहा है. मैंने कहा, थोड़ा बहुत तो समझ में आ रहा है.

बाबा ने मेरे दिमाग में लगे अध्यात्म के जाले को हटाते हुए धीमे से कहा, मैं भी तेरी तरह यादव हूं. महेंद्रगढ़ का रहने वाला रामकिशन यादव. आजकल भरोसे के आदमी मिलते कहां हैं. तू ऐसा कर कि मेरे साथ आ जा. प्रचार का काम देखना, मौज से योग की किताबें लिखा करना. इतने की असेट है और इतने करोड़ का टर्नओवर (संख्या याद नहीं). तुझे कोई दिक्कत नहीं होगी.

मैंने पहली बार बाबा को गौर से देखा, थोड़ी देर पहले ब्रह्ममुहूर्त में कौन कह रहा था, …हर आती जाती सांस को गौर से देखो… न जाने कौन सी सांस, प्रज्ञा को जागृत कर उस परमसत्ता का साक्षात्कार करा दे… जिसने हम सबको क्षुद्रताओं को परास्त करने के लिए रचा है. मैंने कहा, न हो पाएगा बाबा. शराब पीता हूं और मुझे गुस्सा बहुत आता है, आप सहन नहीं कर पाएंगे. बाबा अविचलित थे. उन्होंने कहा, तेरी शराब तो एक महीने में छूट जाएगी और गुस्सा योग से चला जाएगा. चिंता क्यों करता है.

शाम को दफ्तर गया तो पाया कि वहां तो नौकरी से मुक्त करने की तैयारी है. संपादक ने बधाई देते हुए कहा, मालिक ने अनुमति दे दी है, तुम ठाठ से पतंजलि ज्वाइन कर सकते हो. हमारा भी ख्याल रखना. मैं हतप्रभ था. मैंने बाबा से कहा, जल्दबाजी न करिए. दो महीने का समय दीजिए सोच कर बताता हूं. उसके बाद कभी-कभार बाबा के फोन आते रहे, फिर वे समझ गए कि यहां दाल गलने वाली नहीं है.

किम्भो…किम्भो! सोचता हूं कि बाबा का मीडिया मैनेजर हो गया होता तो आज क्या कर रहा होता? लेकिन इससे भी प्रबल तरीके से मन में यह सवाल आता है कि धर्म, राजनीति, उद्योग, साहित्य, पत्रकारिता, कला, सभी क्षेत्रों में कोई भी बिना फरेब, तिकड़म और झांसे के लघुमानव की सीमा के ऊपर क्यों नहीं उठ पा रहा. जो फरेब का उत्तोलक इस्तेमाल नहीं करेंगे क्या वे लघु ही रह जाने के लिए अभिशप्त हैं!

यह श्राप किसने दिया है.

5 COMMENTS

  1. Anil did a great job. I was a ( acting ) Co ordinator of India against corruption in haldwani. Slept sometimes only 2hrs in 24 hrs period for 2 years. Gave many suggestions. One implemented like demanding that Hang us but please pass the lokpal bill. Spent around ten thousand from my pocket. Was present for 10 days in ramlila. Only after my left friend Pankaj told me that USA is giving money to run Anti corruption movement in 600 places. Today I completed reading no 35 of rupe-india.org. Hindi translation. WSF MUMBAI, Ford Foundation. I am surprised that Ford Foundation gave money to the kejrival. There is a link between magasasay awards, Ford Foundation and other imperialist organisation. From last 30 year huge amount of money is coming from this cia front. Surprisingly objective of WSF are same as of Kejrival Anna hazare. On one hand WSF says that no political party can participate in WSF but allowed politicians at personal level. Idea is Don’t do left politics. Don’t criticise Iraq war etc. In Brazil workers party doing the same. In India bengal c m said that in 2004 that they never Boycotted Americans goods post Iraq war. Thousands of people were helping cia, RSS in their plans. Let this be clear to us if we are not on toiling masses and their philosophy ie Scientific socialism than we are doing bourgeois politics. Yes. Even if we say We hate politics. I am feeling sorry that I was Bhakta of that cia movement. I recommend all concerned to read no 35 to know Real politics of Cpi cpim specifically.

    • एतान् चाैरानचाेराख्यान् … भिक्षुकान् … वारयेल्लाेकपीडनात् । काैटल्य

  2. Military intelligence officer RSN Singh. 21 March 2014. quoracom/is there proof that Arvind kejrival party is working for cia

  3. I don’t think RSN is reliable man but cia link statement is right as far as rupe-india.org report is concerned

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