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चुनाव चर्चा: मध्य प्रदेश में वोटर ख़ामोश, पर ‘एन्टी इन्कम्बेंसी अंडरकरंट’ तो है

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चंद्र प्रकाश झा 


राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम की विधानसभा के लिए नवम्बर-दिसंबर 2018 में चुनाव प्रगति पर हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा के कुल 90 निर्वाचन क्षेत्रों में से ‘माओवाद- नक्सल’ प्रभावित 18 सीटों के लिए 12 नवम्बर और शेष 72 सीटों के लिए 20 नवम्बर को वोटिंग संपन्न हो चुकी है। मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को तथा राजस्थान और तेलंगाना में सात दिसंबर को वोटिंग है।

सभी जगह इलेकट्रॉनिक वोटिंग मशीन ( ईवीएम ) से मतदान कराया जा रहा है। सभी की मतगणना एकसाथ मंगलवार 11 दिसंबर को होगी। उसी दिन सारे परिणामों की घोषणा हो जाने की उम्मीद है। इन चुनावों को 17 वीं लोकसभा के मई 2019 से पहले निर्धारित आम चुनाव के लिये ‘सेमीफायनल’ मुकाबला माना जा रहा है। इन राज्यो में से किसी में केंद्र में सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस ( एनडीए) का नेतृत्व कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रत्यक्ष गठबंधन नहीं है। मौजूदा विधान सभाओं का कार्यकाल मिजोरम में 15 दिसंबर, मध्य प्रदेश में 7 जनवरी, छत्तीसगढ़ में 15 जनवरी और राजस्थान में 20 जनवरी को समाप्त होगा। छत्तीसगढ़ में करीब 73 प्रतिशत मतदान हुआ। चुनाव चर्चा के इस अंक में हम मध्य प्रदेश की स्थिति का जायजा लेंगे जहां औपचारिक चुनाव प्रचार बंद हो चुका है और बुधवार 28 नवंबर को यानि कल मतदान है।

मध्य प्रदेश में इस बार के चुनाव में 1,102 निर्दलीय समेत कुल 2,907 प्रत्याशी हैं। सिर्फ भाजपा ने सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये हैं। कांग्रेस ने समाजवादी नेता शरद यादव के ‘लोकतांत्रिक जनता दल ‘ के लिए टीकमगढ़ जिला की जतारा सीट को छोड़ 229 पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं। बसपा के 227, सपा के 51 और आम आदमी पार्टी के 208 प्रत्याशी हैं।

मध्यप्रदेश में करीब पांच करोड़ वोटर हैं, जिनमें 2.41 करोड़ महिलाएं और 1,389 ‘थर्ड जेंडर’ हैं। वोटिंग के लिए इस बार 65341 सेंटर बनाये जाएंगे। विधान सभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं, जिनका राज्य की आबादी में 21 प्रतिशत हिस्सा है। सदन की एक मनोनीत सीट भी है। भाजपा ने 2013 के पिछले चुनाव में 165 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 58 , बसपा को 04 और अन्य को 03 सीटें मिली थीं। प्रदेश से 40 सांसद हैं, जिनमें से 11 राज्य सभा के और 29 लोक सभा के हैं। प्रदेश की सत्ता पर भाजपा पिछले लगातार 15 बरस से काबिज है।

भाजपा ने पिछले चुनाव के अपने कई उम्मीदवार बदल दिए हैं। भाजपा के प्रमुख प्रत्याशियों में बुढ़नी से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा भीतरवार से दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के भतीजे अनूप मिश्र और शिवपुरी से राज्य सरकार में मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी हैं। भाजपा ने मुस्लिम महिला फातिमा रसूल सिद्दीकी को भोपाल उत्तर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और 1992 से जीत रहे हैं आरिफ अकील के खिलाफ उतारा है। बुधनी में शिवराज सिंह चौहान के ख़िलाफ़ समाजवादी पार्टी ने जिन किसान नेता अर्जुन आर्य को अपना उम्मीदवार घोषित किया था वह कांग्रेस में शामिल हो गए। वहाँ कांग्रेसी उम्मीदवार अरुण यादव हैं जो पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) के साथ हाथ मिलाया है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहीरवार के अनुसार इस बार किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा। मालवा और मध्य भारत के आदिवासियों के बीच सक्रिय, जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस ने अपने चुनाव चिन्ह पर मानावार से जयस संरक्षक हीरालाल को टिकट दे दिया है। व्यापमं घोटाला का खुलासा करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ.आनंद राय और व्यापमं मामले के एक अन्य एक्टिविस्ट और पूर्व जेएनयू छात्र आशीष चतुर्वेदी कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं।

कहा जाता है कि राजस्थान में भाजपा -विरोधी माहौल का असर मध्यप्रदेश में भी पड़ रहा है। विंध्य प्रदेश और महाकौशल से भी खबरें भाजपा के माफिक नहीं हैं। स्वदेश के पूर्व पत्रकार शरद जोशी के अनुसार भाजपा की हार तय है, भगवा पाला के लिए 2019 का आम चुनाव भी मुश्किल होगा। उनके शब्दों में ‘ राष्ट्रभक्ति या विचारधारा अपनी जगह है, पेट पालना अपनी जगह। हर वर्ग दुखी है। प्रदेश पर 1,98,000 करोड़ का कर्ज है। जब रोजी रोटी नहीं है तो राम का नाम कौन लेगा?’

‘ द इंडियन एक्सोप्रेस’ में अपने साप्ता हिक कॉलम‘ इनसाइड ट्रैक’ में कूमी कपूर ने लिखा कि भाजपा ने मध्य प्रदेश में मुख्यामंत्री शिवराज सिंह चौहान को सत्ताि बचाने के लिए अकेले छोड़ दिया गया है। उनके मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजरात विधान सभा चुनाव में 34 रैलियां थी और उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 21 रैलियां में भाग लिया था। मगर मध्यप्रदेश के चुनाव में मोदी जी की 11 रैलियां ही तय की गईं।

मध्य प्रदेश में विंध्य, ग्वालियर-चम्बल, मालवा, मध्य भारत, महाकौशल और बुंदेलखंड के छह क्षेत्र हैं। सबसे अधिक 65 सीटें मालवा में हैं जिसे भाजपा का गढ़ माना जाता है। उज्जैन महाकाल मंदिर इसी क्षेत्र में है। मध्य भारत में 39 सीटें है जहां के नेताओं में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव शामिल हैं। बुंदेलखंड में 32 सीटें हैं। पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे बुंदेलखंड को पृथक राज्य का दर्ज़ा दिए जाने की मांग उठती रही है।

ग्वालियर -चम्बल संभाग में भी 32 सीटें हैं जहां कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर होती रही है। कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के ही हैं। विंध्य में 31 सीटें हैं। विधान सभा में विपक्ष एवं कांग्रेस के नेता अजय सिंह इसी क्षेत्र के हैं। महाकौशल में भी 31 सीटें हैं। कांग्रेस की जीत की स्थिति में नए मुख्यमंत्री के लिए उसके प्रबल दावेदार कमल नाथ इसी क्षेत्र से हैं, जो विधान सभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इस क्षेत्र में छिंदवाड़ा और बालाघाटजिलों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का असर है।

कांग्रेस

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संकेत दिए हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत की स्थिति में मुख्यमंत्री कमलनाथ बन सकते है। उन्होंने राज्य में विभिन्न चुनावी रैलियों में कहा कि फ्रांस से राफेल युद्धक विमान खरीद मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने 30,000 करोड़ रुपये अपने ‘ दोस्त अनिल अंबानी की जेब’ में डाले। मोदी जी ने सरकारी कम्पनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से कॉन्ट्रैक्ट छीन कर अनिल अंबानी की कंपनी को दे दिया, जिसके पास विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है। राफेल की जांच जब सीबीआई करने लगी तो आधी रात को प्रधानमंत्री मोदी ने सीबीआई डायरेक्टर को बदल डाला।

राहुल गांधी ने उज्जैन, मुरैना, इंदौर, झाबुआ, खरगोन, धार, मऊ आदि की रैलियों में प्रधानमंत्री मोदी को इंगित करते हुए ‘ चौकीदार चोर है’ के नारे भी लगवाए। उन्होंने वादा किया कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो वह 10 दिन में किसानों के कर्ज माफ कर देगी। उन्होंने ‘ पनामा पेपर्स’ और व्या पमं घोटाला का जिक्र कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके पुत्र कार्तिकेय पर भी निशाना साधा। बाद में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने भाजपा शासित छत्तीसगढ़ के ही मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र के बजाय भ्रम से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के पुत्र का नाम ले लिया था। कार्तिकेय ने विशेष न्यायाधीश सुरेश सिंह की अदालत में दर्ज अपने बयान में कहा कि राहुल ने उनका नाम जानबूझ कर पनामा पेपर्स में जोड़ दिया। मामले की अगली सुनवाई विधानसभा चुनाव परिणाम निकलने के बाद 17 दिसंबर को होगी।

मनमोहन सिंह

चुनाव प्रचार के लिए 21 नवम्बर को भोपाल पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार और भाजपा पर प्रहार किये। उन्होंने मोदी जी पर जनता से वादा खिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि किसान कर्ज के बोझ से दबे हैं, उन्हें फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा। मोदी सरकार का हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा सिर्फ जुमला बन कर रह गया है। डॉ सिंह के शब्द थे, ‘ प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता कि वो गाली-गलौज की भाषा बोलें या विरोधियों की सरकार पर बरसें। देश के लोगों के बीच राफेल सौदे पर संदेह है। विपक्ष और विभिन्न समूह की मांग है कि इसकी संयुक्त संसदीय समिति जांच करे। मोदी सरकार इसके लिए तैयार नहीं है. इससे लगता है कि दाल में कुछ काला है।”

शिवराज सिंह चौहान

भाजपा के शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में 13 बरस से मुख्यमंत्री पद पर हैं। वह 29 नवम्बर 2005 को भाजपा के ही बाबूलाल गौड़ की जगह 17 वें मुख्यमंत्री बने थे। भाजपा अगर यह चुनाव जीत लेती है तो उन्ही के मुख्यमंत्री बनने की संभावना है। उनका विवाह साधना सिंह से हुआ था। दोनों के दो पुत्र , कार्तिकेय और कुणाल हैं। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं। 30 नवम्बर 2013 को उनका नाम बहुचर्चित मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ( एमपीपीईबी) घोटाला में उभरा, जिसे व्यापामं घोटाला भी कहते हैं। देशभर में उठी चिंताओं के बाद जुलाई 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने व्यापामं घोटाला की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए।

अभिमत

सोशल मीडिया एक्टिविस्ट गिरीश मालवीय के अनुसार मतदाता खामोश है। लेकिन अंदर ही अंदर सत्ता के विरुद्ध एक ‘अंडर करंट’ है , जो मतदान के दिन बाहर आएगा। पिछली बार 58 सीट जीतने वाली कांग्रेस के करीब 30 उम्मीदवार ढाई हजार से कम अंतर से हारे थे। लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराज हैं। शायद इसी को भांपकर आखिरी दौर के प्रचार से नरेंद्र मोदी को बाहर रखा गया। विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में बसपा का वोट बैंक है पर उसे 4-5 सीट से अधिक नही मिल सकेगी। ‘ जयस’ मालवा निमाड़ में गेम चेंजर साबित होगा। इस संगठन का आदिवासी-बहुल धार, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ और आलीराजपुर में असर है। ‘ एन्टी इनकबन्सी’ से उपजा अंडर करंट कांग्रेस को 120+ सीट दिलवा सकता है।



(मीडियाविजिल के लिए यह विशेष श्रृंखला वरिष्ठ पत्रकार चंद्र प्रकाश झा लिख रहे हैं, जिन्हें मीडिया हल्कों में सिर्फ ‘सी.पी’ कहते हैं। सीपी को 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण, फोटो आदि देने का 40 बरस का लम्बा अनुभव है।)



 

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