Home काॅलम चुनाव चर्चा: हरियाणा में सबका मंतर ‘जाट’, ताकि खड़ी कर सकें खाट !

चुनाव चर्चा: हरियाणा में सबका मंतर ‘जाट’, ताकि खड़ी कर सकें खाट !

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चंद्र प्रकाश झा 

 

नई लोकसभा के मई 2019 तक निर्धारित चुनाव के साथ हरियाणा में विधान सभा चुनाव कराने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। राज्य की मौजूदा 13वीं विधानसभा के चुनाव अक्टूबर 2014 में कराये गए थे। पिछले चुनाव में जीत के बाद राज्य में अपने दम पर पहली बार सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी  ने मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं। वह करनाल से चुनाव जीते।  खट्टर, मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए भाजपा की ओर से महेंद्रगढ़ से निर्वाचित राम बिलास शर्मा , अम्बाला कैंट से विधायक बने अनिल विज जैसे सारे दावेदारों को दरकिनार कर इस पद पर आसीन हुए।

पृथक हरियाणा राज्य का पहला चुनाव 1967 में हुआ था।  उसका गठन 1966 में , भाषाई आधार पर किया गया था। यह,  भारत के राज्यों के प्रथम पुनर्गठन के फॉर्मूला के ही आधार पर ही किया गया। भारत- पाकिस्तान की सीमा से लगे सिख -बहुल और मुख्यतः पंजाबी -भाषी , पंजाब सूबा को विभक्त कर हरियाणा राज्य का गठन कर उसे  ‘ हरियाणवी बोली’ और हिंदी -भाषी क्षेत्रों को शामिल किया गया। पंजाब के साथ-साथ हरियाणा की भी राजधानी चंडीगढ़ है,  जो प्रशासनिक रूप से केंद्र -शासित प्रदेश है। दोनों ने चंडीगढ़ पर अपना दावा बरकरार रखा है। कालान्तर में पंजाब ने चंडीगढ़ से लगे अपने क्षेत्र , मोहाली को विकसित किया, जहां के स्टेडियम में क्रिकेट मैच होते रहते हैं। हरियाणा ने भी चंडीगढ़ से लगे अपने क्षेत्र पंचकुला को विकसित कर लिया। दोनों के राज्यपाल अलग -अलग होते है। लेकिन दोनों के एक ही , पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट हैं जो चंडीगढ़ में है। कुछेक बार कांग्रेस शासन काल में , दोनों राज्यों के महाअधिवक्ता एक ही रहे हैं। पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक होते है।

अटकलें हैं कि, भारत की राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली को भौगोलिक रूप से कई तरफ से घेरे हुए हरियाणा में अगले विधान सभा चुनाव में भाजपा की चुनावी जीत आसान नहीं होगी। लेकिन हरियाणा के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष , सुभाष बराला इन अटकलों पर कुछ हंसते हुए  कहते हैं  कि विपक्षी पार्टियां  अपनी जीत के लिए दिवास्वप्न देख रही हैं। मौजूदा 90 -सदस्यीय विधान सभा में सर्वाधिक 47 विधायक  भाजपा के है, जो पिछली बार चार सीट ही जीत सकी थी।

कांग्रेस अध्यक्ष , राहुल गांधी के बहनोई और यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायन्स ( यूपीए ) की प्रमुख , सोनिया गांधी के दामाद , रोबर्ट वढेरा का हरियाणा में कारोबार रहा है। उनके दिवंगत ससुर एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के अनुज भ्राता एवं दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कनिष्ठ पुत्र, संजय गांधी के सपनों की छोटी कार बनाने के लिए जापान की सुजुकी कम्पनी के सहयोग से स्थापित मारुति उद्योग लिमिटेड इसी राज्य में है। रॉबर्ट वढेरा और राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रहे, भूपिंदर सिंह के खिलाफ कथित भूमि घोटाला को लेकर प्रदेश पुलिस के समक्ष हाल में एक ‘ प्राइवेट ‘ एफआईआर दर्ज की गई है। वढेरा ने इस एफआईआर को ‘ इलेक्शन सीजन ‘ का कारनामा बताया है।

राज्य में सत्तारूढ़ रहे , इंडियन नेशनल लोक दल  (आईएनएलडी ) के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, फिलहाल एक नौकरी भर्ती घोटाले में अदालती दोष सिद्ध होने के बाद 10 साल की सजा काट रहे हैं। उन्हें उनके पिता देवीलाल (अब दिवंगत ) ने केंद्र में 1989 में गठित विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार में उप प्रधानमंत्री बनने के ऐन पहले हरियाणा के मुख्य मंत्री की अपनी कुर्सी सौंपी थी। तब बतौर मुख्यमंत्री चौटाला का शपथ ग्रहण असामान्य रूप से, दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में आयोजित समारोह में हुआ था। आईएनएलडी की बागडोर अभी, दिवंगत देवीलाल के पौत्र अभय सिंह चौटाला ने संभाल रखी है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी राजनितिक हार नहीं मानी है। वह गढ़ी सांपला किलोई से निर्वाचित विधायक हैं और तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की जुगत में हैं। उन्होंने 22 चरणों में हरियाणा के सभी जिलों का चुनावी दौरा करने की योजना बना रखी है। इन जिलों में से पलवल से पानीपत की दो चरणों की उनकी चुनावी यात्रा पूरी हो चुकी है। उनके पिता भारत की संविधान सभा के सदस्य थे। उनके पुत्र , दीपेंदर सिंह हुड्डा 2014 के लोक सभा चुनाव में रोहतक निर्वाचन क्षेत्र से जीते थे। वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। दीपेंद्र हुड्डा खुल कर कहते हैं–  भाजपा और आईएनएलडी ‘ हुड्डा फोबिया’  से ग्रस्त  हैं। उनके अनुसार विधान सभा के अगले चुनाव में कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए पार्टी आला कमान ‘ सही समय पर सही फैसला’ करेगा। हुड्डा खेमे को शायद लगता है कि बहुजन समाज पार्टी इस बार कांग्रेस गठबंधन संग आ सकती है। एक नेता ने कहा, ‘ मायावती और सोनिया गांधी का आपसी स्नेह , हम कर्नाटक में एच डी कुमारस्वामी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में देख चुके हैं।’  उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती की नेतृत्व वाली बसपा का राज्य में चुनावी जनाधार 4 से 6 फीसदी बताया जाता है। बसपा का राज्य में अभी सिर्फ़ एक विधायक है।

ऐलानाबाद से विधायक अभय चौटाला कहते हैं कि कांग्रेस के चार नेता, सीएम कुर्सी की रेस में आपसी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने इन चारों के नाम भी गिनाये हैं – हुड्डा, प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अशोक तंवर,  कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी हैं। किरण चौधरी , राज्य के  मुख्य मंत्री रहे बंसीलाल की पुत्रवधु हैं और अभी तोशाम से विधान सभा सदस्य हैं। भारत में आंतरिक आपातकाल में रक्षा मंत्री रहे बंसीलाल ने बाद में कांग्रेस से पृथक अपनी क्षेत्रीय पार्टी हरियाणा विकास पार्टी बनायी थी जिसका अब कांग्रेस में विलय हो चुका है। अभय चौटाला ने मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में कांग्रेस की कुमारी शैलजा का नाम नहीं लिया जो केंद्र में मंत्री रह चुकी हैं।

अभय चौटाला को लगता है कि सनातनी हिन्दू जाट , सिख जाट और  दलित भी अगले चुनाव में आईएनएलडी और पिछले चुनाव में उसके साथ रहे बसपा के गठबंधन के पक्ष में आ जाएंगे।  ये तीनों समुदाय कुल मिलाकर हरियाणा की आबादी में करीब 50 फीसदी बताये जाते  हैं। आईएनएलडी का मुख्य चुनावी मुद्दा  , एसवाईएल कनाल (सतलज -यमुना संपर्क नहर लिंक) है। अभय चौटाला का आरोप है कि केंद्र की  मोदी सरकार , एसवाईएल कनाल से हरियाणा में पानी पहुंचाने के लिए पंजाब में नहर बनाने के सुप्रीम कोर्ट के 2016 के आदेश को लागू नहीं कर रही है। उनका दावा है एसवाईएल कनाल , हरियाणा की जीवन रेखा और बड़ा आर्थिक  मुद्दा जिसके लिए उनके पिता और पितामह ने लड़ाई लड़ी। उनका आरोप है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार भी एसवाईएल कनाल का पानी हरियाणा तक पहुंचाने के लिए नहर निर्माण परियोजना पूरा करने में अड़ंगा डाल रही है। भाजपा के सुभाष बराला ने कहा आईएनएलडी पार्टी, ‘ अंगुली कटाकर शहीद’  बनने की फिराक में है। उनके अनुसार जब आईएनएलडी और कांग्रेस हरियाणा की सत्ता में थीं तो दोनों ने  इस  मुद्दे पर क्या किया , यह बात किसी से छुपी नहीं है

राज्य के करीब 80 जातीय समुदायों में से 63 अनुसूचित जातियों अथवा अन्य पिछड़े वर्ग के रूप में अधिसूचित बताये जाते हैं।  करीब 26 प्रतिशत ओबीसी में यादव अथवा अहीर , सैनी , गूजर आदि भी शामिल हैं।  लेकिन राज्य का  ‘ जातीय ‘ समीकरण  कुल मिलाकर करीब 30 फीसदी जाट समुदाय के पक्ष में माना जाता है। वैसे , यह जातीय समुदाय,  सनातनी हिन्दू ही नहीं , बिश्नोई जाट, सिख और मुस्लिम धारा में भी विभक्त है।  हुड्डा जी, खुद जाट हैं। लेकिन 2014 के चुनाव में  अधिकतर जाट भाजपा की तरफ खिसक गए। उस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 20.6 प्रतिशत,  आईएनएलडी को 24.1 प्रतिशत और बसपा को  4.4 फीसदी वोट मिले थे। प्रदेश की 90 में से  17  विधान सभा सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है।  राज्य में अनुसूचित जनजातियों, ईसाईयों की तादाद लगभग नगण्य है। मुस्लिम करीब 7 फीसदी माने जाते हैं। पिछली बार रिकार्डतोड़ 76.54 %. मतदान हुआ था। प्रत्याशी भी रिकार्डतोड़ 1,351 थे जिनमें  116 महिलाएं थीं।   जाट समुदाय को फिलहाल सरकारी नौकरियों में आरक्षण की अपनी मांग को लेकर भाजपा की कथित बेरूखी के कारण नाराज कहा जाता है।

हरियाणा जनहित कांग्रेस ( भजन लाल ) भी चुनाव मैदान में उतर सकती है जिसका नेतृत्व पूर्व मुख्य मंत्री भजन लाल (अब दिवंगत) के पुत्र कुलदीप बिश्नोई कर रहे हैं। बिश्नोई खुद अभी आदमपुर से विधायक हैं।  खबर है कि दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी हरियाणा की सभी विधान सभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।

चुनाव में मनोहर लाल खट्टर सरकार में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठना भी स्वाभाविक है। भाजपा का जवाबी प्रचार , दूसरे दलों के शासन काल में कथित भ्रष्टाचार और घोटालों को उठाने की की लगती है। गत फरवरी में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जींद की अपनी रैली में कहा था, ‘  हमारा मुख्यमंत्री भ्रष्ट नहीं है। उन पर भ्रटाचार का एक भी आरोप  नहीं है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्रियों का रेकॉर्ड देखें। अभय चौटाला दावा करते हैं कि उनके पिता ओम प्रकाश चौटाला ही हरियाणा के अगले मुख्यमंत्री होंगे। इस पर भाजपा पूछती है, ‘ क्या हमारा मुख्यमंत्री जेल से शासन चलाने वाला होगा  ? ‘

इस सिलसिले में,  रॉबर्ट वाड्रा और भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ कथित जमीन घोटाले को लेकर हालिया दर्ज पुलिस प्राथमिकी, भाजपा खेमे की पेशकदमी मानी जा सकती है।

हरियाणा में बरसों प्रशासनिक अफसर रहे और हाल में कांग्रेस में शामिल हुए प्रदीप काशनी ने मीडिया विजिल को बताया कि हुड्डा सरकार के समय रॉबर्ट वाड्रा को विवादित जमीन के आवंटन मामले में ‘ ढींगरा आयोग’ की रिपोर्ट राज्य की मौजूदा सरकार को सौंपी जा चुकी। लेकिन खट्टर सरकार ने वह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की है। हुड्डा जी ने  इस आयोग के गठन की वैधानिकता को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर सुनवाई लंबित है।

 



( मीडियाविजिल के लिए यह विशेष श्रृंखला वरिष्ठ पत्रकार चंद्र प्रकाश झा लिख रहे हैं, जिन्हें मीडिया हल्कों में सिर्फ ‘सी.पी’ कहते हैं। सीपी को 12 राज्यों से चुनावी खबरें, रिपोर्ट, विश्लेषण, फोटो आदि देने का 40 बरस का लम्बा अनुभव है।)