Home काॅलम तमिलनाडु: लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर एक नज़र

तमिलनाडु: लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर एक नज़र

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सत्रहवें लोकसभा चुनाव के लिए भारत के बड़े राज्यों में से एक तमिलनाडु के 38 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में वोटिंग 18 अप्रैल को शांतिपूर्वक संपन्न हुई। इसमें औसत 72 प्रतिशत का मतदान हुआ। वेल्‍लोर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में डीएमके प्रत्याशी के कार्यालय से भारी मात्रा में नगदी की बरामदगी के बाद चुनाव रद्द कर दिया गया, जो नए सिरे से बाद में कराया जाएगा। लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्य विधानसभा की 18 सीटों पर उपचुनाव के लिए भी वोट डाले गए। डीएमके अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता एम के स्टालिन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वोटर वेरिफाइड पेपर ट्रेल मशीनों में कई जगह गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने केंद्र एवं राज्य की सरकारों की सहयोगी की तरह काम किया।

चुनावी मुकाबला मुख्यतः राज्य में सत्तारूढ़ आल इण्डिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के नेतृत्व वाले गठबंधन और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के नेतृत्व वाले सेकुलर डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के बीच माना जाता है। डीएमके के नेतृत्व वाले एसडीएफ गठबंधन में शामिल घटकों में से खुद डीएमके 20, कांग्रेस 9, सीपीआई, सीपीएम और वीसीके 2-2  तथा एमडीएमके, आइजेके, आईयूएमएल और केएमडीके एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने के बाद अन्नाद्रमुक ने अभिनेता विजयकांत के डीएमडीके के साथ गठबंधन कर उसे चार लोकसभा सीटें लड़ने के लिए आवंटित कर दीं। अन्नाद्रमुक गठबंधन में शामिल भाजपा पांच सीटें और पट्टालि मक्कल कटची (पीएमके) सात सीट और पुठिया तमीज़ह्गम एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। चुनावी मुकाबला में फिल्म अभिनेता कमल हासन की नई बनी पार्टी मक्कल नीधी मैयम (एमएनएम),  एआईडीएमके के विद्रोही दिनाकरण के नेतृत्व वाला गुट एएमएमके और नाम तमिलार काची भी है। पिछले बरस अपनी अलग पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाले फिल्म अभिनेता रजनीकांत ने भी मतदान किया पर अपनी पार्टी के यह चुनाव नहीं लड़ने के बारे में मीडिया से कोई बात नहीं की। संकेत है कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव लड़ेगी। पिछला विधानसभा चुनाव 2016 में हुआ था।

तमिलनाडु विधानसभा की रिक्त 18 सीटों के लिए चुनाव के वास्ते भी मतदान हुए हैं। ये सीटें पिछले विधानसभा चुनाव में निर्वाचित विधायकों के अयोग्य घोषित किये जाने पर रिक्त हैं। ये सदस्य अन्नाद्रमुक के टीटीवी दिनकरन के अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) गुट में चले गए थे। तीन और सीटें रिक्त हैं जिनपर अदालत में मामले लंबित होने के कारण अभी उपचुनाव नहीं कराये गए हैं। इन उपचुनाव के परिणाम अहम साबित होंगे क्योंकि अन्नाद्रमुक को 234 सीटों की विधानसभा में अभी एक स्पीकर को छोड़ 14 सदस्यों का ही समर्थन प्राप्त है। सदन में अभी प्रभावी रूप से 213 सदस्य हैं। सदन में मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के 88, कांग्रेस के आठ और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के एक सदस्य हैं।

तमिलनाडु में विभिन्न राजनीतिक दलों के गठबंधन का पुरानी पीढ़ी का पुराना ढांचा टूट चुका है। राज्य में सत्तारूढ़ आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) का केंद्र में सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) का नेतृत्व कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जाना तय माना जा रहा था। इसी तरह मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) का कांग्रेस के साथ होना तय था। इसमें किसी तरह के संदेह को डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने अपने पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की चेन्नई में स्थापित प्रतिमा के कुछ माह पहले हुए अनावरण के उपलक्ष्य में आयोजित रैली में दूर कर दिया। कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में सभी 40 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किये थे लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली थी। करुणानिधि की प्रतिमा का अनावरण स्टालिन के आमंत्रण पर यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी ने किया। रैली में नई पीढ़ी की ओर से स्टालिन ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदार के रूप में पेश करने का प्रस्ताव सामने रख दिया। ऐसा संभवतः पहली बार हुआ। रैली में अन्य नेताओं के अलावा स्वयं राहुल गांधी और आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख एवं मुख्यमंत्री नारा चंद्रा बाबू नायडू ही नहीं, केरल के मुख्यमंत्री एवं मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पी विजयन भी उपस्थित थे।

पिछले लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में जो राजनीतिक परिदृश्य था वह काफी बदल चुका है। उस चुनाव में एआईएडीएमके ने 39 में से 37 सीटें जीती थीं। उसके बाद मौजूदा 15वीं विधानसभा के 2016 में हुए चुनाव में भी एआईडीएमके गठबंधन ने 234 में से 134 सीटें जीती थीं। द्रमुक के गठबंधन को 98 सीटें ही मिल सकी थीं। जयललिता के निधन के बाद भी राज्य में अन्नाद्रमुक की सरकार तो बरकरार है पर उसकी लोकप्रियता पर गहरे संदेह हैं। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के पुत्र कर्ति चिदंबरम शिवगंगा से प्रत्याशी हैं जहां उनका मुकाबला भाजपा के एच. राजा से है। ये दोनों यहां पिछली बार अन्नाद्रमुक के सेंथिलनाथन से हार गए थे।

राज्य में कई द्रविड़ पार्टियां हैं। फिल्मों से राजनीति में आने वालों की पार्टियों का भी राज्य में राजनीतिक प्रभाव रहा है। इनमें से अभिनेता रजनीकांत की प्रस्तावित पार्टी का क्या रुख रहेगा, इसके स्पष्ट संकेत अभी नहीं मिले हैं। भाजपा ने चुनाव में अभिनेता रजनीकांत की पार्टी को समर्थन देने के संकेत दिए थे। इस बीच आईआईएडीएमके के ‘बागी’ नेता एवं आरके नगर से विधायक टीटीवी दिणाकरण ने शशिकला गुट की तरफ से कुछ माह पहले अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम नाम से एक और द्रविड़ पार्टी गठित कर ली।

द्रविड़ पार्टियों में से वी. गोपालास्वामी (वाइको) की मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) का 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन था। एमडीएमके सात सीटों पर चुनाव लड़ी थी पर वह कोई सीट जीत नहीं सकी। उसने लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद भाजपा का साथ छोड़ दिया। वायको 2016 के विधानसभा चुनाव में वामपंथी दलों, जीके वासन की तमिल मानिला कांग्रेस (टीएमसी), पीपुल्स वेलफेयर फ्रंट,  फिल्मों से राजनीति में आये विजयकांत के डीएमडीके आदि दलों के साथ थे। एमडीएमके ने अब डीएमके के साथ होने का निर्णय किया हैं। कांग्रेस ने राज्य में सिर्फ दो बार- 1977 और 1989 में गठबंधन का नेतृत्व किया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एस. रामादोस की पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ थी। रामादोस ने अपने पुत्र अंबुमणि रामदोस को मोदी सरकार में मंत्री बनाने की मांग की थी। बाद में पीएमके ने 2016 के विधानसभा चुनाव में अंबुमणि रामादोस को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने की शर्त रखी थी। उसने यह शर्त नहीं माने जाने पर भाजपा का साथ छोड़ दिया। पीएमके अब फिर अन्नाद्रमुक गठबंधन के साथ है।

फिल्म निर्देशक व अभिनेता रहे विजयकांत के नेतृत्व वाले देसिया मुरपोकु द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) ने 2014 के लोकसभा चुनाव के ऐन पहले ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था। डीएमडीके ने 14 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किये थे लेकिन वह कोई सीट नहीं जीत सकी। वह 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन से छिटक गई। डीएमडीके ने विधानसभा चुनाव में नवगठित पीपुल्स वेलफेयर फ्रंट (पीडब्लूएफ) से गठबंधन कर 104  सीट पर अपने प्रत्याशी खड़े किये लेकिन उनमें से कोई नहीं जीता। विजयकांत ने अपनी पार्टी 2005 में बनायी थी। वह पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सदन में विपक्ष के नेता रहे थे। अब डीएमडीके अन्नाद्रमुक के साथ है।

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