Home काॅलम चुनाव चर्चा: नागरिकता विधेयक के ज्‍वालामुखी पर बैठे पूर्वोत्‍तर के परिदृश्‍य पर...

चुनाव चर्चा: नागरिकता विधेयक के ज्‍वालामुखी पर बैठे पूर्वोत्‍तर के परिदृश्‍य पर एक नज़र

SHARE
चंद्रप्रकाश झा


सत्रहवें लोकसभा चुनाव के साथ ही भारत के चार राज्यों ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम की विधानसभा के भी चुनाव हो रहे हैं। आंध्र में लोकसभा की सभी 25 और विधानसभा की सभी 175 सीटों पर एक ही दिन 11 अप्रैल को मतदान होगा। ओडिशा में लोकसभा की सभी 21 और विधानसभा की सभी 147 सीटों पर चार चरणों में 11, 18, 23 और 29 अप्रैल को मतदान कराये जा रहे हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में अरूणाचल प्रदेश में लोकसभा की दो और विधानसभा की 60 सीटों तथा सिक्किम में लोकसभा की एकमात्र सीट और विधानसभा की सभी 32 सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होगा। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में सिर्फ लोकसभा की सीटों के लिए मतदान होगा। इनमें से असम की 14, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर की दो-दो, नगालैंड, मिजोरम की एक-एक लोकसभा सीटें हैं।

पूर्वोत्तर के चार  राज्यों-  त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड और मिजोरम की विधानसभा के चुनाव पिछले बरस हुए थे। असम विधानसभा के नए चुनाव 2021 में और मणिपुर विधानसभा का अगला चुनाव 2022 में होना है। पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य में अभी कांग्रेस की सरकार नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में असम और त्रिपुरा में गठबंधन सरकार है।

भाजपा, पूर्वोत्तर में सिक्किम को छोड़ अन्य सभी राज्यों की भी गठबंधन सरकार में शामिल है। पिछले बरस के पूर्वार्ध में त्रिपुरा में हुए चुनाव में  मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ वाम मोर्चे और उत्तरार्ध में मिज़ोरम में सत्तारूढ़ कांग्रेस की हार हुई थी। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल  सिक्किम में  27 मई और अरुणांचल प्रदेश में 1 जून को समाप्त हो रहा है। राष्ट्रीय मीडिया ने पूर्वोत्तर राज्यों की लोकसभा और विधानसभा के चुनाव की ख़बरों से कहीं ज्यादा खबरेँ अन्य राज्यों के चुनाव की दी हैं। मीडियाविजिल के चुनाव चर्चा स्तम्भ के इस अंक में हम पूर्वोत्तर क्षेत्र के चुनाव पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

भाजपा

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्वोत्तर की 25 में से 21 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है। असम के उत्साहित मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को लगता है कि भाजपा सभी 25 सीटों पर जीतेगी। भाजपा अभी असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा में सरकार का नेतृत्व कर रही है। वह नगालैंड और मेघालय की गठबंधन सरकार में शामिल है। भाजपा ने 2014 के पिछले लोकसभा चुनाव में पूर्वोत्तर भारत में आठ सीटें जीती थीं,  जिनमें से सात असम की और एक अरुणाचल प्रदेश की है। भाजपा के पूर्वोत्तर प्रभारी महासचिव राम माधव के अनुसार उनकी पार्टी ने इस क्षेत्र में  अपना चुनावी गठबंधन तैयार कर लिया है। जिन दलों के साथ गठबंधन हुए  हैं उनमे असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा, नेशनल पीपुल्स पार्टी, नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा शामिल है। उन्होंने यह घोषणा करने से पहले नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रिओ, असम के मुख्य मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, मणिपुर के मुख्यमंत्री बिरेन सिंह, अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, असम गण परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा और अन्य नेताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि भाजपा, एनपीपी, एनडीपीपी, एजीपी और बीपीएफ साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने सिक्किम में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा से गठबंधन किया है लेकिन भाजपा के घोषित गठबंधन के दलों में पूरा तालमेल नहीं है। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी ने पूर्वोत्तर की 25 में से 14 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करने की घोषणा की है।

नागरिकता विधेयक

पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के चुनावी मंसूबों में प्रस्तावित नागरिकता विधेयक अड़चन डाल सकता है। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को  पारित कर दिया गया था। उसे राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सका, जहां भाजपा का जोर नहीं है और बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) जैसे सहयोगी दल भी इसके विरोध में उठ खड़े हो गए। इसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से भारत आये मुस्लिमों को छोड़ सभी हिन्दुओं, सिख, जैन,  बौद्ध और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। क्षेत्र के मूल निवासियों  को आशंका है कि इसके कारण बांग्लादेश से पूर्वोत्तर के राज्यों में अचानक हिन्दुओं की बाढ़ आ जाएगी जहां अवैध रूप से रह रहे ‘बाहरी’ लोगों के खिलाफ लम्बे अरसे से आंदोलन होते रहे हैं। इसके लोकसभा में पारित होने पर पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन हुए  लेकिन भाजपा को लगता है कि वह इस विधेयक की बदौलत पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के कुल मिलाकर 58 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के हिन्दुओं के वोट रिझा सकती है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हाल में पश्चिम बंगाल में एक रैली में खुल कर कहा कि हिन्दुओं को इस विधेयक से डरने की कोई जरूरत नहीं है। कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा है कि यह धार्मिक आधार पर है जो संविधान के खिलाफ है। .

असम के पूर्व मुख्यमंत्री एवं एजीपी नेता  प्रफुल कुमार मोहन्ता के अनुसार उनकी  पार्टी के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन कीं बदौलत ही भाजपा राज्य की सत्ता में आयीं। एजीपी ने एनडीए सरकार को दिया समर्थन इस मुद्दे पर वापस ले लिया। भाजपा के कुछ आश्वासन के बाद  यह पार्टी फिर भाजपा गठबंधन में लौट आई। मेघालय के मुख्यमंत्री एवं नेशनल पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष कॉनराड संगमा ने विधेयक को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए संकेत दिए हैं कि इस मुद्दे को लेकर उनकी पार्टी भी भाजपा से अपना सम्बन्ध तोड़ सकती है। मेघालय सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक में विधेयक के खिलाफ बाकायदा एक प्रस्ताव पारित किया गया। मणिपुर में एनपीपी के चार विधायक हैं और यह पार्टी वहां भाजपा के एन बिरेन सिंह की सरकार में शामिल है। त्रिपुरा में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल ‘इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा’ ने भी विधेयक का जोरदार विरोध किया है। मिजोरम के हालिया चुनाव के बाद नई सरकार बनाने वाली मिजोरम पीपुल्स फ्रंट ने भी विधेयक का विरोध किया है। नगालैंड की गठबंधन सरकार के मंत्रिमंडल ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इस विधेयक पर पुनर्विचार करने कहा है। नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के नेतृत्व वाली इस गठबंधन सरकार में भाजपा भी शामिल है। मोदी सरकार द्वारा तैयार नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और अन्यत्र भी व्यापक असंतोष है।

1971 में पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र के गठन के बाद से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में  शरणार्थियों की समस्या ने जन्म लिया, लेकिन वह हिन्दू-मुस्लिम के धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि मूल (स्थानीय) बनाम बहिरागत (विदेशी) शरणार्थी  के रूप में था। विधेयक में  प्रावधान है कि ग़ैर-मुस्लिम समुदायों के भारत में रहने वाले लोगों के छह बरस पूरे हो जाने पर उन्हें आसानी से भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। पहले यह अवधि 11 साल थी। पूर्वोत्तर भारत में इसके खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पूर्वोत्तर के लोगों को डर है कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद उनके राज्यों में विदेशियों की आवक अचानक बढ़ जाएगी जिससे उनकी आबादी का अनुपात बदल जाएगा। नगालैंड में भी नागरिकता विधेयक के विरोध में कुछ प्रमुख संगठनों के बहिष्कार के आह्वान के कारण गणतंत्र दिवस समारोह में छात्र-छात्राओं और आम जनता ने समारोहों में भाग नहीं लिया। मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा ने 24 जनवरी को कहा कि अगर नागरिकता संशोधन विधेयक को रद्द नहीं किया गया तो सत्ताधारी मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) राजग के साथ गठबंधन तोड़ भी सकता है। प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 के विरोध में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के आह्वान पर 4 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन आयोजित किये गए। इस विधेयक के खिलाफ पूर्वोत्तर की कई जगहों के अलावा शिमला में भी प्रदर्शन हुए हैं।  इसके विरोध में मणिपुर के प्रख्यात फिल्मकार अरिबम श्याम शर्मा ने उन्हें भारत सरकार द्वारा 2006  में प्रदान किया गया पद्मश्री पुरस्कार लौटा दिया है।

पूर्वोत्तर में सर्वाधिक 14 लोकसभा सीटें असम में  हैं जहां भाजपा की गठबंधन सरकार है। 2014 के पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सात, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस ने तीन-तीन सीटें जीती थीं। एक सीट निर्दलीय ने जीती थी। भाजपा के गठबंधन  में बोडो पीपुल्स फ्रंट शामिल है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने कांग्रेस से गठबंधन करने के संकेत दिए हैं।

अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश के दक्षिण में असम और नगालैंड राज्य हैं। पश्चिम में भूटान है और  पूर्व में म्यांमार है। इसकी उत्तर की ‘मैकमोहन लाइन’ कही जानी वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा  चीन से लगती है जिसने 1962 के युद्ध के  समय से इस राज्य के अधिकतर भाग को दक्षिण तिब्बत कह उस पर अपना आधिपत्य का दावा कर रखा है। 890 किलोमीटर की यह लाइन 1913-14 में चीन, तिब्बत और भूटान के प्रतिनिधियों के शिमला समझौता के बाद तत्कालीन ब्रिटिश प्रशासक सर हेनरी मैकमोहन के नाम पर है, जिसे चीन ने स्वीकार नहीं किया। अरुणाचल प्रदेश में अभी मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री दोर्जी खांडू के पुत्र पेमा खांडू हैं जो पिछले विधानसभा में कांग्रेस की टिकट पर जीते थे। वह 2016 में  राष्ट्रपति शासन, विधानसभा की सदस्यता से 14 विधायकों के अयोग्य ठहराए गए आदेश, उस  आदेश को निरस्त करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद कलिखो पुल के मुख्यमंत्री बनने और फिर कांग्रेस के नबाम तुकी की मुख्यमंत्री के रूप में विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के ऐन पहले के एक जटिल राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कांग्रेस खेमा के मुख्यमंत्री बने थे।  बाद में पेमा खांडू  बहुमत विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ पीपीए में और फिर भाजपा में शामिल हो गए। मौजूदा केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू अरुणाचल प्रदेश से ही लोकसभा सदस्य  है। वहां 2014 के चुनाव में  दूसरी लोकसभा सीट कांग्रेस ने जीती थी।

भाजपा, अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 54 उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा को हाल  में झटका लगा  जब दो मंत्रियों और 12 विधायकों  ने पार्टी छोड़कर नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में शामिल होने का ऐलान किया। एनपीपी ने अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को अपने 29 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की।

सिक्किम 

32 सदस्यों की मौजूदा  विधानसभा का कार्यकाल 27 मई  को समाप्त होगा। राज्य में 1994 से लगातार  मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है। सिक्किम राजशाही की स्थापना 17वीं सदी में नामग्याल वंश ने की थी। 1890 में सिक्किम ब्रिटिश भारत की रियासत बन गया। 1973 में वहां राजशाही के विद्रोह में आंदोलन भड़क उठे, जिसने 1975 में राजशाही खत्म कर दी। उसी बरस कराये गए जनमत संग्रह के उपरान्त सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया। सिक्किम राज्य विधानमंडल का एक ही सदन विधान सभा है, जिसकी कुल 32 सीटें हैं। लोकसभा और राज्यसभा में उसकी एक-एक सीट है। सिक्किम में राजतन्त्र की समाप्ति के बाद वह पहले भारत का अधिराज्य बना। फिर वह 1975 में भारत गणराज्य का नया राज्य बन गया। एसडीएफ ने एकमात्र लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। पिछली बार यह सीट एसडीएफ ने ही जीती थी। सिक्किम की सातवीं विधानसभा के चुनाव 2014 में हुए थे।


 

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.