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बीएचयू कांड पर बनारस और उत्तर प्रदेश के नागरिक संगठनों की ओर से मांगपत्र

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महोदय/महोदया,

हम नागरिक संगठन और बीएचयू के अध्यापक आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहते हैं कि दिनांक 27 मई को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के बीएचयू आगमन पर विश्‍वविद्यालय और आइआइटी के विद्यार्थी सहारनपुर में दलितों पर हुए हमले के खिलाफ बीएचयू गेट पर शांतिपूर्ण तरीके से बैठकर प्रदर्शन कर रहे थे,जो कि हमारे लोकतंत्र में किसी का भी संवैधानिक अधिकार है। इन विद्यार्थियों पर भारी संख्या में पुलिस बल ने हमला किया और उन्हें जबरदस्ती मारपीट कर और खींच कर ट्रक में भर दिया। गाड़ी में भर कर इन विद्यार्थियों को बुरी तरह पीटा गया, उन्हें गन्दी गालियां दी गईं, शक्ल-सूरत और कपड़ों को लेकर सामन्ती व्यंग्‍य किए गए। ये सारी कार्रवाई लंका थाना सब-इंस्पेक्टर महेश मिश्रा ने की। महेश मिश्रा ने महिला पुलिस की मौजूदगी के बावजूद खुद तीन छात्राओं को मारा-पीटा, उनके साथ धक्का-मुक्की की, उन्हें रंडी, वेश्या सहित अन्य गन्दी गालियां दीं और उनके गुप्तांगों में पेट्रोल डालने की धमकी दी। छात्राओं को दिन-भर कैंट थाने में बैठाए रखा गया,जहां शौचालय की सुविधा भी नहीं थी। महेश मिश्रा ने इन विद्यार्थियों को एनकाउंटर में मार देने की धमकी भी दी।

महोदय, थाना प्रभारी लंका महेश मिश्रा के द्वारा की गई सभी कार्रवाइयां न सिर्फ सामंती, पितृसत्‍तात्मक, महिला-विरोधी और ब्राह्मणवादी है बल्कि असंवैधानिक और गैर-कानूनी भी है। किसी भी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना कानूनन जुर्म है। जब पुलिस के लोग ही इस तरह की गैर-क़ानूनी हरकतों में लिप्त होंगे, तो प्रदेश में महिला-विरोधी, दलित-विरोधी और गरीब-विरोधी अपराधों पर कैसे लगाम लगेगी। ऐसे पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में समाज के दबे-कुचले लोग और महिलाएं अपनी शिकायतें दर्ज कराने उनके पास कैसे जाएंगी। इस कारण हम समाज की बेहतरी के शुभचिंतक जन यह मांग करते है कि-

  1. विद्यार्थियों खास तौर पर छात्राओं के साथ बदतमीजी से पेश आने वाले लंका थाना प्रभारी महेश मिश्रा को तत्काल नौकरी से बर्खास्त किया जाए।
  2. छात्राओं को अश्लील और आपराधिक धमकी देने के लिए महेश मिश्रा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
    3. महेश मिश्रा के अभद्र व्यवहार का मूकदर्शक व सहयोगी बने पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
    4. इस आपराधिक कृत्य के महेश मिश्रा के खिलाफ तत्काल एफआइआर दर्ज किया जाए, जिसे दर्ज नहीं किया जा रहा है।
    5. पुलिस विभाग में लोकतान्त्रिक अधिकारों की चेतना पैदा करने और शालीनता सिखाने के लिए अभियान चलाया जाए।

हम नागरिक समाज के लोग, यौन हिंसा और राजकीय दमन के खिलाफ महिलाएं (WSS), महिलाओं की आवाज़, पीयूसीएल व बीएचयू के अध्यापक

प्रति: डीजीपी उप्र, एसएसपी वाराणसी, आयुक्‍त वाराणसी

 

1 COMMENT

  1. In uttarakhand you will find slogan –” MITRA POLICE ” .Fact is police MUST be natural friends to masses .But no ! Not in a CAPITALIST class society ! Sooner we realize this fact better. So POLICE REFORM is just a MASK. Wage a class war make your OWN POLICE,JUDICIARY, EXECUTIVE.

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