Saturday, January 20, 2018

पड़ताल

‘मुक्काबाज़’ : ब्राह्मणवाद के चेहरे पर एक प्यार भरा मुक्का…!

  अरविंद शेष चूंकि पहले से यह प्रचारित था कि 'मुक्काबाज' जाति के सवालों से भी जूझती है, इसलिए उम्मीद तो थी ही। दरअसल, जब कहीं कुछ नहीं होता है, तब कुछ दिखने पर उत्साहित हो जाना स्वाभाविक है। 'वास्तविक घटना पर आधारित' इस फिल्म में खेल के तंत्र पर काबिज ब्राह्मणों की सत्ता को फिल्मी तरीके से जरूर दिखाया गया...

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